शिक्षाप्रद कहानी | Shikshaprad Kahani | Hindi Story With Morals
शिक्षाप्रद कहानी (Shikshaprad Kahani, Hindi Story With Morals). शिक्षाप्रद कहानियाँ - जो सिखाएँ, राह दिखाएँ! जीवन भर मार्गदर्शन करे सार्थक कहानी की शिक्षा
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बोझ
ज़्यादातर बोझ जिन्हें हम ढोते रहते हैं, वे बोझ मन के होते हैं|दो बौद्ध भिक्षुओं की कहानी|
वृद्ध भिक्षु ने असहाय लड़की की मदद तो की, पर उसे वहीं छोड़ आया...
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महानता की झलक
महानता की झलक सिर्फ प्राचीन अवतारों और प्रसिद्ध नेताओं में ही नहीं, बल्कि हमारे चारों तरफ देखी जा सकती है|आवश्यकता और अवसर आम लोगों को हीरो बना देते हैं|
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माँ-बाप का कर्ज़
बोधकथा: माँ-बाप का कर्ज़क्या ये कभी चुकाया नहीं जा सकता?
कैसा है ये पितृ-ऋण, जो आम आदमी माता-पिता की सच्ची सेवा से भी चुका नहीं पाता?
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मिल गए बोतल वाले
मज़ेदार कहानी: मिल गए बोतल वालेनशा बुरा है, तो बुरे सभी हैं| नशे में कौन नहीं है, मुझे बताओ ज़रा| किसे है होश, मेरे सामने तो लाओ ज़रा|
रोष, इन्दर, मुकेश, इंजीनियरिंग कॉलेज व हॉस्टल के किस्से
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मेरी मेहनत का फल
मेरी मेहनत का फल मुझे लाभ क्यों न दे?कर्मचारी उद्देश्य, प्रशंसा और आर्थिक प्रोत्साहन से प्रेरित होते हैं|
कार्यकर्ता प्रेरणा पर बोधकथा
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ये भी रहेगा नहीं
बोधकथा: ये भी रहेगा नहींशाकिर ने फकीर को सिखा दिया कि इंसान के वक़्त का उसकी नेकी बदी से कोई लेना देना नहीं|
वक़्त का काम है बदलना|
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रोटी की खोज
रोटी की खोज में भागी फिरती है दुनिया, गुरदास मान अपनी सुन्दर पंजाबी कविता ‘रोटी मगर’ में गाते हैं, लेकिन फिर भी सलीके से जिया जा सकता है|कैसे?
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लाइन में लग
मज़ेदार कहानी: लाइन में लगजीवन को पूर्णता की नहीं, प्रेम की ज़रूरत है|
प्रेम सही व्यक्ति मिलने से नहीं, मिले व्यक्ति को सही से समझने से उपजता है|
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वफादार बीवी
मज़ेदार कहानी: वफादार बीवीचुटकुला एक कंजूस के बारे में, जो मर कर अपनी सारी दौलत के साथ दफ़न होना चाहता था, पर अपनी चतुर पत्नी से मात खा गया|
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शराब पीने दे मस्जिद में
बोध कथा: शराब पीने दे मस्जिद मेंकहाँ बैठ कर पी जाये शराब?
इसपर ग़ालिब, मीर, इकबाल, फराज़ और वसी की उर्दू शायरी लिए एक मज़ेदार कहानी
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सनी कैसे न?
आध्यात्मिक कहानी: सनी कैसे न?बरसात की एक अँधेरी रात में कबीर अपनी पत्नी माई लोई को एक साहूकार के पास ले चला ताकि वो उसके साथ सोकर अपना कर्ज़ उतार ले
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सिक्के के दो पहलु
सिक्के के दो पहलु - हेड व टेल की तरह, आदमी के भी दो पहलु होते हैं - अच्छाई और बुराई|अच्छे-बुरे लोग नहीं होते, अच्छी-बुरी हमारी नज़र होती है|
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सीरियाई शरणार्थी संकट
सीरियाई शरणार्थी संकट सिर्फ सीरियन रेफुजिओं की समस्या नहीं|सीरियन शरणार्थी संकट यूरोपियन शरणार्थी संकट है - पूरे यूरोपीय संघ की त्रासदी...
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हम काम किसलिए करते हैं?
बोधकथा: हम काम किसलिए करते हैं?पैसे के लिए, या उस क़ाबलियत के लिए कि हम अपना वक़्त और पैसा अपने प्रियजनों पर खर्च कर सकें|
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हाथी की बेड़ी
पेरेंटिंग कहानी: हाथी की बेड़ीक्या बड़ों को प्रणाम करने से घर के क्लेश मिट सकते हैं?
कौरव कुलवधुएँ बड़ों का सम्मान करतीं, तो क्या महाभारत रूकती?
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