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OUTSIDE!भगवान गुम (Bhagvan Gum), मतलब उसकी बड़ी मुसीबत, जोश ने सोचा, क्योंकि वो तो पहले से ही अपनी शरारतों के लिए बदनाम है|

 

बच्चे कैसे सोचते हैं? इसपर मज़ेदार कहानी...

पिछली कहानी: पढ़ें इस किस्से से पहले की कथा: सेवा पड़ी भारी | Seva Padi Bhari (अभी अप्रकाशित)

बालवाड़ी (किंडरगार्टन) में जिग्नेश का नया मोबाइल खो गया था, इसलिए वह काफी परेशान था|

टीचर भी परेशान थी कि जिग्नेश के माँ-बाप ने इतनी छोटी उम्र में ही उसे इतना महँगा सामान दे दिया|

लड़का दुःख से पगलाया हुआ था| पूछने पर, समझा बस इतना पा रहा था, कि जोश ने उसके फोन में बहुत रुचि दिखाई थी|

टीचर ने जोश को पूछताछ के लिए बुलाने का फैसला किया, ताकि तफ्तीश की जा सके कि कहीं उसने तो ये फोन नहीं चुरा लिया|

जोश की दूसरी शरारतों को देखते हुए, शायद यही वक्त था की उसे सिखाया जाए कि जब कोई और हमें नहीं भी देख रहा होता, तब भी खुदा तो हमें देख ही रहा होता है|

टीचर के कमरे में जोश की पेशी हुई| एक बड़ी, रोबीली मेज़ के उस पार से, जिसके पीछे टीचर बैठी थी, वह उसे घूर रही थी| कुछ पलों तक, कमरे में सन्नाटा छाया रहा|

जोश को इस दफ्तर में आना कतई पसंद नहीं था, और ये चुपचाप घूरना तो उसे और भी डरा रहा था| कमर के पीछे अपनी उंगलियाँ मरोड़ता, वह चुपचाप खड़ा रहा|

जब कुछ और पल तक कुछ नहीं बोला गया, तो असहजता मिटाने के लिए, एक पाँव के जूते से वह दूसरे पाँव के पीछे खुजाने लगा|

“तूने जिग्नेश का फोन लिया?” टीचर ने आखिर पूछ ही लिया|

लड़के ने मना कर दिया| उसने जिग्नेश को बुक्का फाड़ कर रोते हुए देखा था|

“तुझे दिखा कहीं वो फोन?” टीचर ने आवाज़ थोड़ी सख्त करते हुए फिर पूछा|

लड़के ने फिर सिर हिला दिया|

“पक्का?” उसे घूरते हुए वह गुर्रायी|

उसने चुपचाप हामी भरी और अपनी नज़रें झुका लीं| उसे डरता देखकर टीचर ने सोचा, कि समय आ गया ये घोट देने का, कि ईश्वर से कुछ छुपा नहीं|

तर्जनी से उसकी ओर इशारा करते हुए, वह फुफकारी, “परमात्मा कहाँ है?”

जोश ने मेज़ के नीचे नज़र दौड़ाई, कमरे के कोनों में, दफ्तर में सब तरफ, लेकिन कहा कुछ नहीं| टीचर चिढ़ गयी, कि ये नज़र बचा रहा है|

उसने फिर लड़के को इशारा किया, और भिनभिनाई, “परमेश्वर कहाँ है?”

लड़के ने फिर चारों ओर देखा, लेकिन फिर कुछ नहीं बोला|

‘ये छोकरा ऐसे ध्यान नहीं देगा!’ टीचर ने सोचा|

मेज़ पर लगभग फैल कर, अपनी तर्जनी वह लड़के की नाक के ठीक नीचे तक ले आई, और चिल्लाई, “प्रभु कहाँ हैं?”

जोश की चीख निकल गयी| वह कमरे से सरपट भाग लिया| घर तक दौड़ता चला गया| घर में बड़े भाई को देखा, तो उसका हाथ पकड़कर उसे ऊपर अपने कमरे की अलमारी तक खींच लाया, जहाँ दुबक कर दोनों भाई अकसर अपने राज़ बाँटा करते थे|

“बड़ी मुसीबत हो गयी!” वह सुबका|

“बड़ी मुसीबत?” होश ने पूछा| “वो कैसे?”

"भगवान गुम गया!" जोश ने सिसकी भरी| "और उन्हें लगता है कि मैंने गुमा दिया!"

अगली कहानी: पढ़ें इस किस्से से आगे की कथा: यीशु देख रहा है | Yishu Dekh Raha Hai (अभी अप्रकाशित)