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cancerक्या कैंसर रोग नहीं (Kya Cancer Rog Nahi)?

 

कैंसर बीमारी हो या सिर्फ दोष, मुद्दा तो है, क्योंकि कैंसर कोशिकाएँ गैर-कैंसर कोशिकाओं के लिए बना ग्लूकोस चुरा लेती हैं

पिछली कहानी: कोई दोस्त है न रकीब

जब उसके स्मार्टफोन पर वोट्सएप फेमिली चैट ग्रुप की बीप हुई, तो होश ने काम से सिर उठाकर देखा|

कैंसर रोग नहीं है’ नामक एक उत्तेजक स्वास्थ्य टिप्स वाली विडियो शेयर हुई थी|

“ये शेयर करने के लिए शुक्रिया, बुआ जी,” उसने जवाब में टाइप किया| “लेकिन ये मामला विवादास्पद है| कृपया सारे प्रमाण देखकर अपनी सेहत के लिए विवेक पूर्ण निर्णय लें| इस पर मेरी सोच ये है:”

“लेट्रियल या ऐमिग्डेलिन, जिसे वे विटामिन बी17 बुला रहे हैं, सच्चा विटामिन नहीं| ऊपर से, इसे एक सुरक्षित कैंसर-रोधक उपचार की तरह गलत प्रमोट किया गया है|”

“मैं समझता हूँ, कि ज़्यादा से ज़्यादा ये एक कीमोथेरेपी दवा की तरह काम करेगा – इसका एक्टिव इंग्रीडीएंट (सक्रिय संघटक) साइनाइड है| गलत मात्रा में या बगैर निगरानी इस्तेमाल करने पर, साइनाइड ज़हरीला होता है|”

“2015 में एक कोक्रेन समीक्षा ने लेत्राइल सम्बंधित सबूतों का सार ये कहते हुए किया कि फिलहाल कोई भरोसेमंद नैदानिक डेटा (clinical data) इन दावों का समर्थन नहीं करता कि लेत्राइल या अमिगडालिन कैंसर मरीज़ों पर अच्छा असर करता है|”

“सिर्फ इसलिए कि स्कर्वी विटामिन सी की कमी की वजह से होती है, से ये अर्थ तो नहीं निकलता कि कैंसर ठीक भी एक विटामिन से किया जा सकता है|”

“एक संतुलित आहार खाना, जिसमें ताज़े फल, फली, और अनाज प्रचुर मात्रा में हो, बेशक सेहत के लिए फायदेमंद होगा, लेकिन मुझे यकीन नहीं कि खुबानी की गुठलियाँ या इस लेत्राइल के कैप्सूल दबा के खाना आपके लिए अच्छा हो सकता है|”

“तर्क बढ़िया किया,” रोष ने जवाब में लिखा| “सेल के अनियंत्रित विकास का दोष है कैंसर, जिसमें सेल बेलगाम विभाजित हो-हो कर शारीरिक ऊतकों का नाश कर देते हैं|”

सौ से ज़्यादा तरह के कैंसर हैं| तो, तार्किक लगता है ये निष्कर्ष निकालना, कि असामान्य कोशिका विभाजनों की ऐसी भीड़ का इलाज एक विटामिन से कहाँ हो पायेगा|”

“हरेक के शरीर में ऐसी कोशिकाएँ हैं, जो कैंसर बन सकती हैं| फिर भी मुमकिन है कि एक को कभी कैंसर न हो, पर दूसरे को हो जाए| लेकिन क्या सारे बिगड़े सेल कैंसर होते हैं? नहीं, कुछ को तो किसी इलाज की ज़रूरत नहीं होती| कुछ की तो कभी शिनाख्त तक नहीं हो पाती|”

“कैंसर मुद्दा बनता है, क्योंकि कैंसर वाली कोशिकाएँ आम कोशिका से 15 गुना ज़्यादा ग्लूकोस खाती हैं| चूँकि वे गैर-कैंसर कोशिकाओं के लिए बना ग्लूकोस चुरा लेती हैं, तो सामान्य कोशिकाओं को बहुत कम ग्लूकोस मिल पाता है और वे बहुत बीमार हो जाती हैं|”

“इससे बहुत काम खराब होते हैं| इसीलिए ‘कैंसर’ शब्द खौफनाक लगता है, डरा देता है|”

“मुझे लगता है कैंसर एक दिन दिखाएगा हमें, कि हमारे कुछ पूर्वज सैकड़ों सालों तक कैसे जी पाए| इसकी छाती में छुपा है अमरत्व का राज़, अगर कोई खोजना चाहे तो|”

"वो कैसे?" जोश ने पूछा|

“मानव शरीर खरबों कोशिकाओं से बना है,” रोष ने लिखा, “और कैंसर इनमें लगभग कहीं भी शुरू हो सकता है| आमतौर पर, मानवीय सेल शरीर की ज़रूरत अनुसार पनप कर, विभाजित होकर, नए सेल बनाते हैं| जब ये कोशिकाएँ बूढ़ी हो जाती हैं, या चोट खा जाती हैं, तो ये मर जाती हैं, और नयी कोशिकाएँ इनकी जगह ले लेती हैं|”

“जब कैंसर पनपता है, तो ये व्यवस्थित प्रक्रिया टूट जाती है| जब सेल और अधिक असामान्य होते जाते हैं, तो वो बूढ़े और क्षतिग्रस्त सेल ज़िन्दा बचने लगते हैं जिन्हें मर जाना चाहिए था, हालाँकि अब उनकी ज़रूरत नहीं रही| ये फालतू सेल बिना रुके बंटते रह सकते हैं, और ट्यूमर नामक गाँठें बना सकते हैं|”

“तो, कैंसर सेल्स उन इशारों को नज़रंदाज़ कर पाते हैं जो अमूमन सेल को ये बताते हैं कि उन्हें अब विभाजित होना रोक देना चाहिए, या जो अपोपटोसिस (apoptosis, एपोप्टोसिस) नामक क्रमादेशित (programmed) कोशिका मृत्यु प्रक्रिया को शुरू करते हैं, जिसका गैर-ज़रूरी सेल्स से निजात पाने के लिए शरीर इस्तेमाल करता है| बूझ लो कैसे करते हैं कैंसर सेल ये, पा जाओगे लंबी उम्र का सत| हाइड्रा को गुरु बना लो!"

“लेकिन फिलहाल कैंसर निवारण पर ध्यान देते हैं| शेयर की गयी विडियो ने अपना पक्ष मज़बूती से नहीं रखा, लेकिन रूढ़िवादी दवा की जगह प्राकृतिक इलाज के विचार को - इस मामले में विटामिन B17 के उपयोग से - एक व्यवहार्य (viable) विकल्प के रूप में पेश तो किया ही है|”

"हालाँकि होश आम आदमी को खतरनाक रसायनों (साइनाइड) से न खेलने की चेतावनी ठीक ही दे रहा है, फिर भी विष का उपचार में प्रयोग तो सदियों से चला आ रहा है| खून पतला करने के लिए पश्चिमी चिकित्सा खुद वारफरिन का इस्तेमाल करती है, जो चूहे मारने का जहर है, और कुछ मामलों में इससे लोगों को मदद मिली भी है|”

“कीमोथेरपी, जो कैंसर के लिए एक आम पाश्चात्य उपचार है, खुद सभी मानवीय कोशिकाओं के लिए विषैली है| उन्हें मारने से पहले यह अच्छी बुरी कोशिकाओं के बीच अंतर नहीं करती|”

“ये सभी सेल मार देती है| फिर भी ये इलाज मरीज़ों को इस उम्मीद से दिया जाता है कि संपार्श्विक क्षति (collateral damage) के बावजूद, इससे सब (या ज़्यादातर) बिगड़ी कोशिकाएं मर लेंगीं, और अच्छे सेल्स को फिर जी उठने का एक मौका और मिलेगा|”

“यदि लेटराईल या विटामिन B17 जैसे खास पोषक तत्व, हिफाज़त से या नरमी से कैंसर कोशिकाओं को मार नहीं भी पाते, तो भी वैकल्पिक चिकित्सा का क्षेत्र ज़बरदस्त सम्भावनाएँ रखता है|"

एच पाइलोरी को सफलतापूर्वक मारने में हल्दी की पहचान अब दुनिया-भर के अव्वल नंबर पौधे या बूटी की तरह होती है| असल में, हल्दी कैंसर के लिए भी चोटी के हर्बल उपचारों में से एक है|”

“बहुत दिलचस्प,” इन्टरनेट पर प्रासंगिक शोध ढूँढ कर होश ने वापिस लिखा, "आपने बताया मुझे, नहीं तो मुझे पता ही नहीं था कि हल्दी की क्षमता का अध्ययन हो रहा है| यह देखने में दिलचस्पी होगी मुझे, कि इस अनुसंधान का क्या नतीजा निकलता है!"

“हालाँकि, हल्दी में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी के खिलाफ कारगर सक्रिय संघटक कर्कुमिन (curcumin) था| शुद्ध हल्दी पाउडर में कर्क्यूमिन की एकाग्रता उच्चतम होती है, वज़न का औसतन 3.14%|”

"एक अध्ययन में, एच पाइलोरी का टीका लगे चूहों को 7 दिन तक लगातार 25 मिलीग्राम / किलो वजन कर्क्यूमिन खिलाया गया| एच पाइलोरी से होने वाला नुकसान इस स्टडी में कर्कुमिन ने कम कर दिया या उल्टा दिया| इसके अलावा, जब 3 सप्ताह बाद फिर जाँच की गई, एच पाइलोरी का उन्मूलन हो चुका था|”

“लेकिन, ये शोध चूहों पर किया गया था – मनुष्यों पर नहीं| और ये सिर्फ एक शोध है, जो 24 चूहों के एक छोटे नमूने (12 नियंत्रण में, और 12 प्रयोगात्मक समूहों में) पर किया गया|"

“हफ्ता-भर रोज़ाना हल्दी खिलाकर, 75 किलो के इंसान में से एच पाइलोरी का सफाया करने के लिए उसे 1875mg / दिन कर्क्यूमिन (यानी 60 gm/ दिन हल्दी) खिलाना पड़ेगा| यानी लगभग 20 चम्मच रोज़ ..."

“प्वाइंट है,” रोष ने माना, “लेकिन संभावना तो देख| दवा की खुराक और इलाज की मियाद तो कभी भी घटा-बढ़ा सकते हो, अगर ये पता हो कि इलाज होता किससे है|”

“हल्दी और शहद, और अदरक और शहद के संयोजन (combination) भी कैंसर के इलाज के लिए नाम कमा रहे हैं| दालचीनी के कैंसर-रोधी गुणों की भी चर्चा है|”

“सही, पा,” होश ने लिखा| “मैं कई बातें नहीं जानता| तो, इन चर्चाओं, शेयर्ड वीडियो और पारिवारिक घरेलु नुस्खों की अक्लमंदी से कुछ सीखने का मौका तो रहता ही है| लेकिन रिकार्ड के लिए कह दूँ, कैंसर सिर्फ एक बीमारी का नाम नहीं| यह संबंधित रोगों के गुट का नाम है!"

अगली कहानी: पढ़ें इस किस्से से आगे की कथा: (अभी अप्रकाशित)