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جحا وحمارهहास्य कथा: पूरक रिश्ते (Purak Rishte)

 

मज़ाकिया समीकरणों से सत्य देव सिद्ध करता है कि आदमी कमाता इसलिए है ताकि उसकी औरत खर्च कर सके!

 

फिर दोनों को गधा साबित भी करता है...

पिछली टेलटाउन कहानी: ध्यान रखने वाला पति

“हॉ, हॉ, हॉ," ईशा हँसी|

“किस बात पर हा-हा-हा कर रही हो?” रोष ने अपनी किताब से ऊपर देखते हुए, उससे पूछा|

"बीजगणित समीकरणों जैसी कुछ मज़ाकिया समीकरण हैं,” उसने जवाब दिया, और पत्रिका में से ऊँचे सुर में पढ़ने लगी|

"समीकरण 1 कहती है:"

मानव = खाना + सोना + हगना + मज़ा + काम
गधा = खाना + सोना + हगना
इसलिए:
मानव = गधा + मज़ा + काम

“इस बारे में आपका क्या ख़याल है?” उसने रोष से पूछा|

“आदमी वो गधा है जिसे काम में मज़ा आता है,” रोष ने पेशकश की|

“व्याख्या दिलचस्प है,” वह मुस्कुरा दी| “लेकिन सत्य देव निष्कर्ष निकालता है कि

मानव - मज़ा = गधा + काम

यानी आम बोली में, जो मनुष्य मस्ती करना नहीं जानता, वह काम में डूबे रहने वाला गधा है।"

हास्यपूर्ण था यह| उसने अपनी किताब नीचे रख दी, और बिस्तर में उसकी तरफ घूम गया| उसके चेहरे से ज़ाहिर था कि उसके पास अभी कुछ और लतीफे बाकी थे...

वह समीकरण 2 पर जा पहुँची:

नर = खाना + सोना + हगना + पैसा कमाना
गधा = खाना + सोना + हगना
इसलिए: नर = गधा + पैसा कमाना

“इस से क्या समझे आप?” उसने पूछा|

“आदमी वो गधा है जो पैसे कमाता है,” रोष ने सुझाव दिया| “कमाऊ टट्टू!”

“हास्यप्रद,” ईशा खिलखिला उठी| “लेकिन सत्य देव ये अर्थ निकालता है कि

नर - पैसा कमाना = गधा

तो, जो पुरुष पैसा नहीं कमाता, वो गधा है|”

“स्त्री का भी कोई सूत्र (फार्मूला) है उसके पास?” रोष ने पूछा|

“है न,” उसने जवाब दिया, और समीकरण 3 पढ़ने लगी:

नारी = खाना + सोना + हगना + पैसा खर्चना
गधा = खाना + सोना + हगना
इसलिए: नारी = गधा + पैसा खर्चना

“हमारे घरेलू गणितज्ञ का क्या अनुमान है इस बारे में?” उसने रोष को छेड़ा|

“औरत वो गधी है जो पैसा खर्च करती है,” रोष मुस्कुराया| “खर्चीला खच्चर!”

“इसके विपरीत,” ईशा ने ख़ुशी से ताली बजाते हुए कहा| “सत्य देव ये मतलब निकालता है कि

नारी - पैसा खर्चना = गधा

दूसरे शब्दों में, वो महिला जो पैसा खर्च नहीं करती, वह गधी है|"

“और कोई सयाने नतीजे?” रोष उदारता से हार मानकर हँस रहा था अब|

“आज सज़ा के बड़े प्यासे हो आप,” वह कहकहा लगा उठी| “हाँ, समीकरण 2 और 3 से, सत्य देव यह भी निष्कर्ष निकालता है कि

नर - पैसा कमाना = गधा = नारी - पैसा खर्चना

इस बारे में आपका क्या कहना है?”

“तो, नर जो पैसा नहीं कमाता = मादा जो पैसा खर्च नहीं करती,” रोष ने कोशिश की| “वो दोनों गधे हैं| मुझे लगता है, सत्यदेव गधा है जो ऐसी-ऐसी समीकरण बनाता है|”

ईशा इस इंतज़ार में कि रोष कुछ खुलासा करेगा, उसे सवालिया आँखों से देख रही थी, लेकिन उसने हँसकर सिर्फ सिर हिला दिया| इस बार वह उसकी चाल में फंसना नहीं चाहता था|

"सत्य देव गधा नहीं है," उसने कुछ पल रुक कर कहा, "हालाँकि आदमी है वो भी। वो प्रतिभाशाली है|"

“वो कैसे?” रोष ने प्यार से उसे देखते हुए पूछा| “तुम्हारा मतलब कि वो प्रतिभावान गधा है|”

ये सब गधा-पच्चीसी उसे उत्तेजित कर रही थी। शब्दों के साथ खेलना, शरीर के साथ खेलने से पहले का ज़बरदस्त खेल था| लेकिन सिर्फ खेल ही था| और अब वो खेलना चाह रहा था कुछ असली खेल|

“देखते नहीं आप?” ईशा ने सीधे चेहरे से उससे पूछा| “आदमी पैसा कमाता है, ताकि उसकी औरत पैसा खर्च कर सके| वो कमाता इसलिए है, ताकि अपनी जोरू को गधी बनने से रोक सके! और वो खर्च इसलिए करती है, ताकि अपने मर्द को गधा बनने से रोक सके!”

“ये सही है,” रोष ने दांत निपोड़े| “मियाँ काम कर-कर के गांड घिसाए, ताकि बेगम साहिबा खर्च कर सकें| कितना पूरक रिश्ता है!”

उसकी हसरत अब घटने लगी थी| ईशा ने उसके मूड का बदलाव भाँप लिया|

“लेकिन जान,” मैगज़ीन साइड में रख कर, वह उससे सट गयी| “समीकरण 1 और 2 से,

नर + नारी = गधा + पैसा कमाना + गधा + पैसा खर्चना

यानी, आदमी + औरत = 2 गदहे, जो खुशी से संग-संग रहते हैं!”

“गधों की तरह इतना काम कर लेने के बाद,” उसने अब शरारत से पूछा, “क्या हम खुशी से संग-संग नहीं रह सकते?”

“बिल्कुल रह सकते हैं,” रोष ने उसके चूतड़ पर चपत लगाते हुए कहा| “लेकिन फिलहाल माबदौलत फौरन खुश हुआ चाहते हैं|”

“ऊह,” ईशा चंचलता से उसके कान में फुसफुसाई| “आपके अन्दर का गधा निकालने के लिए कुछ ज़्यादा करना नहीं पड़ता!”

बेलगाम हँसते हुए वे दोनों, एक दूसरे पर लोटपोट होने लगे| उनके ठहाकों ने घर के सोये संगीत को जगा दिया|

“फिर हो गए शुरु,” ऊपर दीवार पर बैठी मकड़ी ने हल्के विनोद से अपनी आँखें मटकायीं, और अपनी पकड़ मज़बूत करने के लिए, अपने जाल में भीतर की ओर दौड़ चली|

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