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Pirate Flagअरेबियन नाइट्स किस्से: अली बाबा और 40 डाकू 17 (Ali Baba Aur 40 Daku 17)

 

मरजीना अपनी साहसी योजना को अंजाम देती है|

 

होश जले के परिणाम व इलाज के बारे में बताता है|

पिछली कहानी: अली बाबा और 40 डाकू 16

रोष जोश की अधीरता और अशिष्टता पर हँसा, और कहानी आगे बढ़ाई|

“मरजीना जानती थी कि अब रसोई में वापिस जाने का वक़्त हो गया है,” उसने कहा|

“वो और इंतज़ार नहीं कर सकती थी, क्योंकि तेल अब जल्दी ही धुँआने लगेगा और आग पकड़ लेगा|”

“आँगन के मैदान से अपने हैंडल वाले पतीले में रेत भर, वह तेज़ी से वापिस चल पड़ी|”

“उसने रसोई का दरवाज़ा खींच कर खोला, और लपकती लपटों के पास पहुँच कर आग पर रेत फेंक दी| ज़्यादातर आग पलक झपकते ही बुझ गयी|”

“उसने अपना खाली पतीला देग के गर्म तेल में डुबोकर भरा| उसे ध्यान से पकड़े, वह दबे पाँव सबसे पास वाली ट्रोजन बैरल के पास पहुँची और खौलता तेल उसने लकड़ी के ढक्कन के बीचो-बीच की ढलान पर उड़ेल दिया|”

“रुके बिना, वह दबे पाँव देग के पास वापिस दौड़ गयी और अपना पतीला फिर भर लिया| उसे लेकर फिर ध्यान से वापिस दौड़ी, अगली बैरल के ढक्कन पर उड़ेलने|”

“बार-बार, उसने पतीले भर-भर के निकाले, और ध्यान से उन्हें बैरलों के पास एक-एक करके ले जाकर, उनके ढक्कनों पर उड़ेल दिया| फिर और भरने को वापिस दौड़ी आई|”

“मरुआना के कण अभी भी हवा में तैर रहे थे, और अपनी शारीरिक मशक्कत के बावजूद वह खुद को हल्का महसूस कर रही थी| अपना काम निपटाने के लिए उसके कदम तेज़ हो गए, क्योंकि वह अच्छी तरह समझ गयी थी कि वो खुद अब कितने बड़े खतरे में थी और फोकस रहने की खुद अब उसे कितनी ज़रूरत थी|”

“आखिरी ट्रोजन तेल-की बैरल पर आखिरी पतीला तेल उड़ेलने तक उसे खुद अपने शरीर का कुछ होश बाकी न रहा था| कंपकंपाती टाँगों पर, ठोकरें खाती, वह अपनी कोठरी तक पहुँची और अपने बिस्तर पर ढह गयी|”

“भाग-दौड़ से थकी-टूटी और नशे से उनींदी, अपने हाथों, हथेलियों, पंजों और पैरों पर छिले छालों और उस अजीब से कोण को जो उसकी मुंडी ने बिस्तर पर बना रखा था, देखकर उसे बहुत हैरत हुई|”

“उसने अपना सिर सीधा करने की कोशिश की, लेकिन वह बिस्तर से बाहर फिसल गई, और बगल की ज़मीन पर जा गिरी| बेहोश होने से बहुत पहले ही उसके मन पर बुरे सपनों ने कब्ज़ा कर लिया था|”

रोष खामोश हो गया था और अपने बेटे के कमरे से बाहर फैली रात की कालिख में खो गया था| उसके अपने हैवान उसे सताने उसके अतीत से लौट आये थे|

“और 37 डाकुओं का क्या हुआ, पा?” जोश ने पूछा| पिता की चुप्पी से बन गया तनाव उसे नाकाबिले-बर्दाश्त था|

“गंभीर जलों से तत्काल तंत्रिका आघात (नर्वस शॉक) हो सकता है," होश ने अपने पिता के लिए जवाब दिया| “मरीज़ पीला पड़ जाता है| भ्रमित, चिंतित, दर्द से घबराया, बेहोश हो सकता है|”

“लेकिन इससे कहीं ज़्यादा खतरनाक है माध्यमिक झटका (सेकेंडरी शॉक), जो मरीज़ को कुछ घंटों बाद लगता है| इसकी खासियत है रक्तचाप में नाटकीय गिरावट, जिससे पीलापन आता है, सिरे ठन्डे पड़ जाते हैं, और अंततः मरीज़ ढह जाता है|”

“ये माध्यमिक सदमा प्रचलन (सर्कुलेशन) से फ्लूइड (द्रव्य) खो जाने की वजह से लगता है| न सिर्फ नष्ट हो गए ऊतकों से खोया तरल पदार्थ, बल्कि उन क्षतिग्रस्त क्षेत्रों से रिसता द्रव्य, जहाँ त्वचा का कवच अब नहीं रहा|”

होश ने अपने पिता की ओर देखा, प्रतीक्षा में कि वे कुछ कहेंगे| लेकिन रोष उसकी ओर देख कर मुस्करा भर दिए और कुछ नहीं बोले|

“जले से मौत सिर्फ ऊतक (टिशू) नष्ट होने से ही नहीं होती,” उसने आगे कहा, “बल्कि द्रव्य और नमक की इस रिसावट को होते रहने देने से भी होती है| अगर सर्कुलेशन से रक्त आयतन (वॉल्यूम) के पाँचवें हिस्से से ज़्यादा खो जाए, तो दिल तक इतना खून पहुँच ही नहीं पाता जितने की रक्तचाप बनाए रखने के लिए हृदय को ज़रूरत है|”

“और नमक का नुकसान, खास तौर पर सोडियम और पोटैशियम लवण का, न सिर्फ शरीर में उनका संतुलन ही बिगाड़ देता है, बल्कि शारीरिक द्रव्यों और खून के ओस्मोटिक संतुलन को भी बदल देता है|”

“इन लुटेरों को तुरंत रक्त या प्लाज्मा आधान (ट्रांस्फुशन) की, और घावों में इन्फेक्शन (संक्रमण) रोकने के लिए किसी चीज़ की ज़रूरत है, लेकिन ये तो वहाँ पड़े रहेंगे शायद - बेहोश, बिना-देखभाल के - धीरे-धीरे प्राण स्रावित (लीक) करते|”

“क्या तुम्हें पता है,” होश ने आगे कहा, “कि जले के इलाज के बाद द्रव्य का बड़े पैमाने पर स्थानांतरण भी अंग खराब हो जाने जैसी जटिलताएँ पैदा कर सकता है|”

“बहुत बुरे जले मरीज़ का रक्त दबाव बनाए रखने के लिए लगभग हमेशा बड़ी मात्रा में इन्ट्रावेनस (अंतःशिरा) द्रव्यों की ज़रूरत पड़ती है, लेकिन ये द्रव्य शरीर की उन जगहों में भी पहुँच सकते है जहाँ इन्हें नहीं जाना चाहिए, जिसके कारण ज़बरदस्त सूजन और दूसरी गंभीर समस्याएँ पैदा हो जाती हैं| इसे ‘थर्ड स्पेसिंग’ कहते हैं|”

“गंभीर जले से यदि मरीज़ की सांस लेने की नली सूज जाए, तो एसफिक्सिया (दम घुटना) भी हो सकता है| असल में, एस्फिक्सिया छाती की दीवार कसने से भी हो सकता है, क्योंकि जले हुए टिशु (ऊतक) कठोर और बेलोच (लचक रहित) होते हैं|”

“अगर हाथ या पैर जल जाए, तो इसी अलचकदार टिशू की वजह से ब्लड सर्कुलेशन (रक्त परिसंचरण) की कमी के कारण हाथ-पैर भी चले जाते हैं|"

रोष ने अपने बेटे को बोलते सुना, लेकिन उसके अपने विचारों की कड़ी टूट चुकी थी| वह रजाई के भीतर गहरे पसर गया, और बिस्तर पर अपनी पीठ के बल चुपचाप लेटा, छत को घूरता रहा| उसके कानों ने अपने बेटे के अंतर्दृष्टि भरे स्पष्टीकरण के अंश पड़े, “... चमड़ी आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है ..."

"... समस्या मूल रूप से तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट हानि से ... गंभीर संक्रमण की बहुत बड़ी दर, जिसके कारण घातक सेप्टिक सदमा लग सकता है ... आन्तरिक रक्तस्राव से मृत्यु... परिगलित चर्म के ऊतकों से खून में विषाक्त पदार्थ रिस कर गुर्दे की तीव्र विफलता और अन्य जटिलताओं ... बड़े पैमाने पर हिपोवोलेमिक शॉक ... "

ईशा ने रोष को देखा और जान गयी कि उसके आराम का समय हो गया| लेकिन लड़के अभी सोने को तैयार नहीं थे| वे और चाहते थे, लेकिन वह चुक गया था| और देने के लिए उसके पास कुछ न था|

ईशा ने अगली सांझ कहानी पर प्रतिबंध लगा देने की धमकी देकर दोनों को आखिर विदा किया| लड़कों को उनके बिस्तरों में टांक कर, वह उसे अपने बिस्तर में सहला कर सुलाने ले चली|

"होश ठीक निकल जाएगा,” रोष ने उसांस भरी| “अगर जोश ठीक निकल जाए, तो मैं शांति से जा सकता हूँ|”

गहन सघन मनमोहक वन तरु, तुमको आज बुलाते हैं,” वह प्यार से फुसफुसाई, “किन्तु किये जो वादे तुमने, याद तुम्हें वो आते हैं|”

“अभी कहाँ आराम पड़ा, यह मूक निमंत्रण छलना है| अरे अभी तो मीलों तुमको, मीलों तुमको चलना है|”

वह जल्द ही सो गया| अपने बिस्तरे में उसके साथ लेटी, वह उसके बाल सहलाती, उसकी परेशान नींद को निहारती रही| एक मूक आँसू उसके गालों पर फिसल चला| और देखते-देखते उसके तकिये के ताने-बाने में खो गया|

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