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north carolinaक्या हम अपने पैराशूट पैकर (Parachute Packers) को जानते हैं?

 

जीवन में कौन-कौन हमारा पैराशूट हमारे लिए पैक करता है?

 

आभारी होने व उनका शुक्रिया अदा करने पर एक दिलचस्प बोधकथा

पिछली कहानी: पढ़ें इस किस्से से पहले की कथा: (अभी अप्रकाशित)

क्रिसमस लगभग सिर पर था| वक़्त दोबारा आराम का, तरो-ताज़ा होने का, चिंतन का, मनन का| और ज़िन्दगी और दोस्ती के लिए शुक्रिया कहने का|

इस समय गिफ्ट, कार्ड, ईमेल, टेक्स्ट भेजना और फोन करना एक रस्म सा हो गया था रोष के लिए, जिसे वह हर साल पूरी शिद्दत के साथ निभाता था, हालाँकि खुद तो वो क्रिसमस मनाता भी नहीं था|

अपनी एड्रेस बुक के लोगों के बारे में वह बैठा-बैठा सोच रहा था| उसका परिवार, दोस्त, मिलने वाले| कैसा रहा ये साल, उसने सोचा, और कैसी रही उसकी ज़िन्दगी इस साल?

क्या कहे वह उन लोगों को, जिन्होंने इस साल किसी न किसी तरह उसके जीवन को छुआ था| कैसे अपनी कृतज्ञता व्यक्त करे? शब्द मिल नहीं रहे थे|

उसके परिवार के लिए, 2016 का वर्ष आर्थिक दृष्टि से इंतज़ार का साल रहा था, लेकिन भारत में अपने विस्तृत परिवार से इस साल वे कुछ और जुड़ पाए थे|

ईशा के पिता की पिछले साल मृत्यु के बाद, ईशा की माँ से मिलने अब जाकर रोष और ईशा इंडिया आ पाये थे| इस साल वहां पहुँचकर उन्होंने भारतीय बैंक उत्पादों में निवेश का कार्यक्रम भी शुरू कर दिया था|

लौटे हुए, चीन में निवेश का आंकलन करने उन्हें दौरे पर जाना था| अच्छी शुरुआत के बावजूद उनका दौरा तब खराब हो गया, जब दोनों को छाती के गंभीर संक्रमण ने चीन में जकड़ लिया| वहीं उन्हें ईशा के भाई की मौत की खबर भी मिली|

न्यूज़ीलैण्ड वापस आकर, वे इस साल कारीगरों से कुछ ज़्यादा काम नहीं करा पाए, क्योंकि पिछले साल बिकने डाले दोनों घर अभी तक बिके नहीं थे, हालाँकि अगस्त में ऑकलैंड के घरों का औसत बिक्री मूल्य एक मिलियन NZD (दस लाख न्यूज़ीलैण्ड डॉलर) पार कर गया था|

कटते-कटते कीवी ओसीआर (Official Cash Rate, OCR) 1.75%, और ऑस्ट्रेलियाई ओसीआर 1.5% प्रतिवर्ष रह गया था, लेकिन चारों बड़े ऑस्ट्रेलियाई बैंक दोनों देशों में बंधक धारकों (मॉर्गेज होल्डर्स) को ये राहत पूरी तरह पहुंचाने में विफल रहे थे| वे ऑस्ट्रेलिया में खटाई में पड़ गए अपने उच्च जोखिम अपार्टमेंट ऋण को कवर करने की कोशिशें कर रहे थे।

ऑकलैंड में संपत्ति की बढ़ती हुई कीमतों को पहले हुए विधायी परिवर्तन तो नहीं रोक पाए थे, लेकिन जॉन की ने रिज़र्व बैंक गवर्नर को 40% LVR (लोन-टू-वैल्यू रेशियो) नियम तेजी से लागू करने के लिए उकसा कर, अगस्त में उन्हें आखिरकार गिरफ्तार कर ही लिया था|

इस बीच, NZX (न्यूज़ीलैण्ड स्टॉक एक्सचेंज) ने देश में वैनगार्ड ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड, ETF) जारी किये, जिनमें से कुछ में रोष ने अपनी एक कंपनी के मार्फत निवेश कर डाला|

वैश्विक शेयर बाज़ार पिछले साल की बाबत ये साल ऊँचाई पर ख़त्म कर रहे थे, लेकिन रोष को शांति किरायेदारों से परेशानियाँ कम होने और घरों में मरम्मत की ज़रूरत कम होने से मिली|

अमेरिका में ट्रम्प, और भारत में मोदी ने प्रतिद्वंद्वियों को हैरतंगेज़ मात दी| मोदी अपनी सर्जिकल-स्ट्राइक्स पर मुग्ध थे, लेकिन 500 और 1,000 रुपये के भारतीय नोट चलन से अचानक हटा देने से कई भारतीयों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया|

साल भर बहस के मुद्दे रहे तिब्बत-नेपाल सीमा पर तिब्बती लोगों का विस्थापन और चीन का मुख्य भूमि से चीनी मूल के लोग वहाँ लाकर बसाना, सीरियन युद्ध, ब्रेक्सिट, की का इस्तीफा और ब्राज़ील की पहली महिला राष्ट्रपति, डिल्मा रुसेफ पर महाभियोग|

व्यक्तिगत मोर्चों पर, रोष ने पिछले साल टेलटाउन के हिन्दी और अंग्रेज़ी वर्गों का जो विभाजन शुरू किया था, वह अभी तक पूरा नहीं हुआ था| इस साल नई कहानियाँ भी कम लिखी गईं थीं, और कहानी अनुवाद भी कम हुए थे|

शुक्र ये था, कि चीन से लौट कर उनकी सेहत सुधर गयी थी| कई समीक्षा अनुरोधों के बाद, ईशा की पगार में इस साल अंततः 50 सेंट प्रति घंटा की बढ़ोतरी भी हुई थी, हालाँकि उसके अन्य लगभग सभी सहयोगियों को, जिनका वेतन भी पिछले तीन साल से बढ़ाया नहीं गया था, इतनी राहत भी इस साल नसीब नहीं हुई थी|

होश ने अपना शोध वर्ष, हर साल की तरह, उच्च पुरस्कारों और वज़ीफों के साथ समाप्त किया था| लेकिन फिर भी वो चिन्तित था, कि क्या उसने अपनी वर्षांत लिखित रिपोर्ट में होनर्स डिग्री मिलने लायक काम पूरा कर दिया था|

रिपोर्ट में कुछ कमी-बेशी हो जाने पर भी उसे स्नातकोत्तर डिप्लोमा मिलना तय हो चुका था, लेकिन वो ये चाहता नहीं था कि उसके बायोडाटा (CV) में डिग्री से कम कुछ भी लिखा जाए|

मेलबर्न में हुए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में उसकी शोध पत्र प्रस्तुति अच्छी रही थी, और फिलहाल वो दक्षिणी अफ्रीका में जोहानेसबर्ग के एक अस्पताल में अपना इलेक्टिव पूरा कर रहा था|

जोश का बोर्डिंग स्कूल इस साल समाप्त हो गया था, और अब वह अपने पिता की कंपनियों के लिए निवेश के अवसरों का अनुसंधान करने और तथ्य खोजने के मिशन पर ऑस्ट्रेलिया के बड़े-छोटे तटवर्ती शहरों में घूम रहा था|

क्रिसमस के बाद उसे जोहानसबर्ग के लिए उड़ना था, जहाँ अपने भाई के साथ मिलकर उसका निवेश शोध करना, और उसी सम्बन्ध में फिर वहां से केपटाउन तक जाना तय हो चुका था|

उसके बाद पूर्वेक्षण के लिए दोनों को साथ-साथ लंदन, और वहां से यूरोप के लिए उड़ान भरनी थी| होश का अगले साल ऑकलैंड विश्वविद्यालय में अंतिम वर्ष था, जिसके लिए फरवरी में उसकी वापसी तय थी|

जोश की यूरोप से वापसी फ्लाइट होश से कुछ दिनों बाद की थी, हालाँकि ऑकलैंड पहुँच कर जल्दी ही उसे फिर डनीडन के लिए उड़ना था, जहाँ फरवरी में ही उसके मेडिकल स्कूल का पहला साल शुरू था|

ज़ाहिर था कि उसने इस साल इतनी मेहनत तो कर ही ली थी, कि ओटागो विश्वविद्यालय की छात्र वृत्ति उसे मिल जाए|

रोष के भाई और उनके परिवार ठीक थे, और साप्ताहिक फोन कॉल के माध्यम से वह अपने माता-पिता के संपर्क में बना रहा था| उसकी बहन के वैवाहिक जीवन में उथल-पुथल अभी भी मची हुई थी, लेकिन अपने कैरियर में प्रगति करना अब उसने शुरू कर दिया था|

आर्थिक रूप से तो ये साल ढीला रहा था, लेकिन परिवार और दोस्त-मित्रों के साथ जुड़ने के अवसर इस साल अच्छे आये थे| तो, क्या कहे उन सब से इस साल वह?

इस विषय पर अभी भी वह कुछ स्पष्ट नहीं हुआ था, अभी भी असमंजस में झूल ही रहा था| दूर क्षितिज को निहारते हुए, आत्म निरीक्षण में खोया था वह, जब उसका स्मार्टफोन बज उठा| उसके भाई धीर ने WhatsApp पर एक कहानी फॉरवर्ड की थी उसे|

उसे पढ़ते हुए वह मुस्कुरा उठा| ऐसा लग रहा था मानो खुद प्रकृति ने ही उसके अबूझे सवाल का जवाब उसे भेजा हो| ख़याल अब मिल गया था, सिर्फ शब्दों भर की ज़रूरत थी| उसने सन्देश में कुछ तबदीली की, और मेसेज अपनी एड्रेस बुक को फॉरवर्ड कर दिया| उसमें लिखा था:

जनरल अनंत एक आलीशान योद्धा और कमांडर थे। लड़ाई के एक मिशन में ट्रांसपोर्टर प्लेन से युद्ध में जाते हुए, एक मिसाइल ने उनका प्लेन मार गिराया था|

सुरक्षित रूप से पैराशूट करके वे बच तो गए, लेकिन युद्ध में लगी चोटों की वजह से उनका फील्ड कैरियर खत्म हो गया|

कुछ साल बाद, किसी रेस्तरां में बैठे वे अपने खाने का आनंद ले रहे थे, जब एक अनजान आदमी ने अचानक आकर उनसे पूछा, “आप जनरल अनंत हैं न? कुछ साल पहले एक मिशन में आपका प्लेन मार गिराया गया था!”

"हाँ," अनंत हड़बड़ा गए| "लेकिन आप ये सब कैसे जानते हैं?"

"मैंने ही आपका पैराशूट पैक किया था," उस आदमी ने सादगी से कहा, और मुस्करा दिया|

भौंचक्के अनंत, उस आदमी का हाथ मिला कर उसका आभार व्यक्त करने, लड़खड़ाते हुए उठे|

“थैंक यू,” उन्होंने कहा| “यदि उस दिन वह पैराशूट न खुला होता, तो आज मैं यहाँ नहीं मिलता|”

अनंत उस रात सो नहीं सके। उस आदमी के बारे में सोचते रहे| उन्हें ख़याल आया कि बेस पर कितनी बार वे इस आदमी के आस-पास से निकले होंगे, उससे बिना कुछ कहे, यहाँ तक कि उसे बिना नोटिस किये| क्योंकि वे जनरल थे, और ये आदमी सिर्फ एक अदना, बेनाम, सुरक्षा कर्मचारी|

क्या हम सब अपने पैराशूट पैकर को जानते हैं? कौन है वो, जो हमारा पैराशूट पैक करता है? हर किसी के लिए कोई न कोई होता है, जो उसके लिए कुछ करता है, जिसकी उसे ज़रूरत होती है|

कितनी चीज़ों की रोज़ हमें ज़रूरत होती है? हमारे जूते, फोन, कार, कंप्यूटर! किसने पैक किये वे हमारे लिए? हवा, पानी, धूप, धरती! किसने पैक किये ये हमारे लिए?

जब हमारे विमान मार गिराए जाते हैं, तो हमें कई तरह के पैराशूट की ज़रूरत पड़ती है| शारीरिक पैराशूट, भावनात्मक पैराशूट, आध्यात्मिक पैराशूट, वित्तीय पैराशूट|

अपने अस्तित्व के लिए, ज़रूरत पड़ने पर, इन्हीं का इस्तेमाल हमें बचाता है| लेकिन जीवन की दैनिक चुनौतियों में, हम एक महत्वपूर्ण काम करना भूल जाते हैं|

हम उन्हें पहचानते नहीं, उनका शुक्रिया अदा नहीं करते, जिन्होंने हमारे पैराशूट हमारे लिए पैक किये|

मैं आप सबका धन्यवाद करना चाहता हूँ, कि आपने इस साल, किसी न किसी तरह से, मेरा पैराशूट पैक किया – चाहे मनसा, वाचा, या कर्मणा| आशा है कि 2017 आपके लिए सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि लेकर आएगा...

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