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Massive influx of Syrian Kurdish refugees into Turkeyसीरियाई शरणार्थी संकट (Siriyayi Sharanarthi Sankat) सिर्फ सीरियन रेफुजिओं की समस्या नहीं|

 

सीरियन शरणार्थी संकट यूरोपियन शरणार्थी संकट है - पूरे यूरोपीय संघ की त्रासदी ...

पिछली कहानी: पढ़ें इस किस्से से पहले की कथा: अवांछित मेहमान (अभी अप्रकाशित)

रगमेकर ऑफ़ मज़ार-ए-शरीफ में,” जोश ने आगे कहा, “नजफ ऑस्ट्रेलिया सुरक्षित आ तो जाता है, लेकिन वहाँ वूमेरा जेल में कैद कर दिया जाता है|”

“उसके ऑस्ट्रेलियाई वार्डन उससे कहते हैं कि यहाँ अवैध रूप से उतर कर, उसने क्यू (कतार) तोड़ने की कोशिश की है| वाकई?”

“अगर उनके अपने वतन में सब ठीक होता, तो क्या ऑस्ट्रेलिया आने के लिए लाखों शरणार्थी कतार में होते? या यूरोप आने के लिए ही? अपने जीवन में जो कुछ भी उन्होंने बनाया, लगभग वो सब कुछ वहीं पीछे छोड़कर| मुझे तो नहीं लगता!”

“समस्या जटिल है," रोष ने स्पष्ट किया, "क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय कानून के अंतर्गत, 'शरणार्थी' शब्द केवल उन लोगों पर लागू होता है जो जबरन विस्थापित कर दिए गए हैं|"

“इसमें वो लोग शामिल नहीं हैं जिन्हें जंग, अकाल, प्राकृतिक आपदा, जलवायु परिवर्तन या ज़बरदस्त गरीबी की वजह से मजबूर होकर भागना पड़ा|”

“जो लोग आंतरिक रूप से अपने ही देश में कहीं और विस्थापित होते हैं, उन्हें भी इसमें शामिल नहीं किया जाता| तो, असल में पीड़ित लाखों लोग, कानूनी बारीकियों में फंस जाते हैं, और गैर-कानूनी करार दिए जाते हैं| यानी शरणार्थी रुतबे, या और तरह की हिफाज़त पाने से वो (वंचित) रह जाते हैं|”

“मेज़बान देशों को अख्तियार है,” जोश ने कहा, “कि वे अपनी सरहद बंद कर दें, या घुसपैठियों को निकाल बाहर करें| लेकिन आदमियत को इसकी जो कीमत चुकानी पड़ती है, उसका क्या? मानवीय बनने का क्या?”

“क्या नजफ जैसे लोग ज़िन्दा रह पायेंगे अगर उन्हें अफ़ग़ानिस्तान वापिस भेज दिया जाए, जहाँ तालेबान ने पहले ही उन्हें यातनाएं दीं, और मार डालने की कोशिश की? क्या सीरियन गृह युद्ध से भागते लोग बच पायेंगे यदि सभी पड़ोसी मुल्क उनके लिए अपनी सीमायें बंद कर दें?”

“शरणार्थियों को रहने की इजाज़त देने से पहले,” ईशा ने भाव-भीनी सिफ़ारिश करते लड़के को शांत करने की कोशिश की, “उनके मेज़बानों को यह तय करना पड़ता है कि वे यहाँ फिट भी हो सकेंगे या नहीं| या कि वे यहाँ और पंगा करेंगे, या पंगों के कारण बनेंगे| ये फैसला न तो आसान है, न जल्दबाज़ी में लिया जा सकता है|”

“और तब तक, रेफुजियों के साथ अकसर करुणा की जगह शक का सुलूक किया जाता है| शरणार्थी को रहने की अनुमति मिलने के बाद भी, इस रिश्ते को कारगर करने के लिए दोनों पक्षों को बहुत मेहनत करनी पड़ती है|”

“फिर आर्थिक कारण भी हैं| मसलन, हंगरी ने अभी हाल ही में कहा कि अपनी ही जनसँख्या के बंदोबस्त के लिए उसके पास संसाधन काफी नहीं, तो मध्य पूर्व से भाग कर आते दसियों हज़ार हताश शरणार्थियों की मदद कर पाने का तो सवाल ही नहीं|”

“फिर भी उसने इतना इंतजाम कर लिया कि अपनी सीमा पर उस्तरे जैसी तेज़ कंटीली बाड़ लगा सके,” जोश को यकीन न हुआ, “ताकि अवांछित मेहमान अन्दर न आने पाएँ| ये लोग मौत से भाग रहे थे, छुट्टी मनाने नहीं आ रहे थे|”

“क्या होगा अगर आप उसके बच निकलने का रास्ता बंद कर दो, जिसके पीछे मौत लगी है| आपने तो सुनिश्चित कर दिया कि वो मरे ही मरे|”

“सिर्फ हंगरी नहीं था,” ईशा ने प्रतिवाद किया| “सीरियाई शरणार्थी संकट पर कई दूसरी यूरोपियन सरकारों ने भी अपने पाँव घसीटे| ऐसे ही कारणों की वजह से, ज़्यादातर मुल्क शरणार्थियों को समस्या के रूप में देखते हैं|”

“फिर भी जर्मनी जैसे देश हैं,” जोश ने बात काटी, “जिन्होंने ठीक इसी समस्या को अवसर की तरह देखा - न सिर्फ ज़रुरतमंदों की मदद करने का, बल्कि खुद अपनी मदद करने का भी|”

“सब असल में आपके दृष्टिकोण पर निर्भर करता है| आप किसी मुद्दे को समस्या की तरह देख सकते हो, और उससे बचने की कोशिश कर सकते हो| या आप उसे अवसर की तरह देख कर समाधान ढूँढ सकते हो, जिससे दुनिया सबके लिए एक बेहतर जगह बने|”

“बाकी के अधिकाँश यूरोप की तरह,” रोष ने जोश का पक्ष लिया, “जर्मनी एक बुज़ुर्ग आबादी है| फिर भी, जर्मन लम्बे समय तक जी रहे हैं, बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की बदौलत| वर्ष 2030 तक, दुनिया भर में एक अरब से ज़्यादा लोग 65 या 65 से ज़्यादा उम्र के होंगे|”

“दो दशक के भीतर, जर्मनी में पेंशन और स्वास्थ्य देखभाल सम्बन्धी भुगतान की ज़बरदस्त समस्या पैदा हो जायेगी, क्योंकि काम कम लोग कर रहे होंगे, और भत्ते की ज़रूरत ज़्यादा लोगों को होगी|”

एंजेला मर्केल ने सराहनीय अंतर्राष्ट्रीय नेतृत्व दिखाया, जब उन्होंने घोषणा की, कि जर्मनी इस साल 8 लाख शरणार्थी स्वीकार करेगा| यानि अपनी जनसँख्या का लगभग 1%|”

“तुलनात्मक पैमाने पर ऐसा समझो, जैसे न्यूज़ीलैण्ड इस साल 46,000 शरणार्थी स्वीकार करे| हम तो साल में केवल 700 लेते हैं, और ये संख्या पिछले लगभग 30 वर्षों में बदली नहीं है|”

“जॉन की ने इस साल न्यूज़ीलैण्ड का कोटा बढ़ाया था थोड़ा,” ईशा बोली| “कुछ लोग तभी से गिले करने लगे कि वो बहिष्कृत अनचाहे विदेशियों का पोषण स्थानीय लोगों को मिलने वाली सेवाओं की कीमत पर कर रहा है|”

“रोने की जगह,” जोश बिफर उठा, “हमें जुड़ना चाहिए और| अपने तट पर आए शरणार्थियों के पुनर्वास में मदद करने के लिए रेड क्रॉस, इंग्लिश लैंग्वेज पार्टनर्स (अंग्रेजी भाषा भागीदार) या विभिन्न अन्य संगठनों का स्वयंसेवक बनकर|”

“हमें उन्हें नौकरियाँ देनी चाहिए| अपने स्कूलों, दफ्तरों और समुदायों में उनसे मुलाकात होने पर उन्हें जानना-समझना चाहिए| जब तक उन्हें अपने बराबर का मान कर हम उनका स्वागत नहीं करेंगे, तब तक उनका ठीक से पुनर्वास नहीं हो सकता| अपने समाज से जुड़ने में हमें उनकी मदद करनी चाहिए|”

“अच्छे लोगों के साथ भी बुरी बातें हो सकती हैं| अन्दर-ही-अन्दर घुटने की जगह, हमें अपने साथी इंसानों की मदद करने के लिए समय, दक्षता और संसाधन दान करने चाहिए| मिल जुल कर हम बदलाव ला सकते हैं|”

“शायद जर्मन अन्य लोगों से ज़्यादा समझ पाए,” होश ने कहा, “कि शरणार्थी अकसर ज़्यादा मेहनत करते हैं| वे शरारत करने नहीं निकले हैं, बल्कि बेतहाशा अपनी ज़िन्दगी को फिर से बना लेना चाहते हैं| आखिरकार, ये वो लोग हैं जिन्होंने अपना सब कुछ खो दिया है|”

"शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त (UNHCR) के अनुसार," जोश ने कहा, "दुनिया भर में लगभग 6 करोड़ लोग हैं जिन्हें जबरन अपने घरों से निकाल दिया गया है|”

“अगर हम ऐसी दुनिया में रह रहे होते जिसमें युद्ध न होते - धार्मिक, आर्थिक या राजनैतिक – तो रिफ्यूजी भी न होते| लेकिन ऐसा तो है नहीं| हम लड़ते हैं!”

“अगर हम ऐसी दुनिया में रह रहे होते जिसमें राष्ट्रीय सीमाएँ न होतीं, राष्ट्रीय पहचान न होती, राष्ट्रीय पूर्वाग्रह न होते, तो भी रेफुजी न होते| लेकिन ऐसा भी नहीं है|”

"चूँकि हम लड़ेंगे भी और मुल्कों को सीमाओं में बांटेंगे भी, तो शरणार्थी तो होंगे| जब त्रासदी का पैमाना बहुत बढ़ जाएगा, तो शरणार्थी संकट भी होंगे| पिछले कई महीनों में कई ऐसे दिन थे, जब रोजाना 10,000 से अधिक मजबूर प्रवासियों को यूरोप में सीमा लाँघ कर आना पड़ा|”

“पासपोर्ट-मुक्त शेंगेन क्षेत्र के यूरोपीय विचार से,” होश ने कहा, “एक ज़्यादा खुली दुनिया बनाने में मदद मिल सकती है| मुझे तो ये ख्याल पसंद है| बड़ा नवीन, बड़ा दिलचस्प लगता है ये मुझे| और जर्मनी ने तो दिखा भी दिया है, कि वो ये बांटने वाली दीवारें और मुद्राएँ गिरा सकती है| युद्ध किये बिना!”

“कम से कम कोई एलन कुर्दी तो नहीं मरेगा तब,” रोष ने उसांस भरी, “वो तीन वर्षीय सीरियाई बच्चा जो भूमध्य सागर में डूब गया, जब उसका परिवार तुर्की से तीसरी बार भागने की कोशिश कर रहा था|”

“लेकिन मुझे शक है, कि इंसान के रूप में हमारी प्रोग्रामिंग है अपनी राष्ट्रीय पहचान को पालना, और अपनी तमाम सनकों के लिए आपस में लड़ते रहना|”

“तो फिर इस समस्या का अगला सबसे अच्छा समाधान है," जोश ने कहा, "शरणार्थियों की उत्पात क्षेत्र के आस-पास ही मदद करना| ताकि राहत के लिए उन्हें ज़्यादा दूर न जाना पड़े| इस तरह, सुरक्षित जगह पहुँचने के लिए कम से कम घिनौने हालात में लम्बे-लम्बे सफर करने के जोखिम तो कुछ कम होंगे|”

“एलन का परिवार कनाडा पहुँचने की कोशिश में था| नजफ़ अफ़ग़ानिस्तान से ऑस्ट्रेलिया भाग आया, दुनिया के दूसरे कोने में| दुखद तो है, पर जो लाखों लोग अफगानिस्तान से पड़ोसी पाकिस्तान में चले आये, कम-से-कम उनकी यात्रा तो ज़्यादा सस्ती और महफूज़ रही होगी|”

"2011 के बाद से, जब से लड़ाई छिड़ी, 40 लाख शरणार्थी सीरिया से भाग आये| संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी के अनुसार, लगभग 18 लाख पड़ोसी तुर्की में जा घुसे, 6 लाख से अधिक जॉर्डन में, और 10 लाख लेबनान में - एक ऐसा देश जिसकी खुद की आबादी सिर्फ 40 लाख है|”

"शरणार्थी पड़ोसी देशों की तत्काल समस्या हो सकते हैं, लेकिन हम अब एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जो पहले से कहीं ज़्यादा जुड़ी है आपस में|"

“अगर शरणार्थियों की बाढ़ देश संभाल न पायें, तो वे सीमाएँ बंद कर देने को ही आमादा होंगे| इससे तो शरणार्थी संकट बढ़ेगा ही, और इसकी मानवीय और वित्तीय लागत बढ़ेगी|”

“अगर दंगा-क्षेत्र से दूर-दराज़ के मुल्क भी मदद करें, धन, खाना, कपड़े, दवा, और स्वयंसेवक दान करके, तो मेज़बान राष्ट्रों पर कम ज़ोर पड़ेगा और इस समस्या से निपटने में उनकी तत्परता बढ़ेगी|”

“यूरोपियन यूनियन से संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी UNHCR, उनके विश्व खाद्य कार्यक्रम और अन्य एजेंसियों को खरबों यूरो की मदद का वचन दिलवाने में अगुआई करके, जर्मनी ने इसमें भी अनुकरणीय उदारता दिखाई|”

"हाल ही में उसने तुर्की, जॉर्डन, लेबनान और दूसरे देशों में सीरियन रेफुजिओं के लिए दी जाने वाली आर्थिक मदद में भी बढ़ोतरी की| हंगरी जैसे मुल्कों ने इस यूरोपीय शरणार्थी संकट में योगदान देने में आना-कानी की, क्योंकि उनपर पहले से ही भारी क़र्ज़ था|”

“लेकिन व्यापक कोशिश के मद्देनज़र, वे भी आखिरकार इसमें आ जुड़े, ताकि वे कारण कम किये जा सकें, जो सीरिअनों को यूरोप के लिए जलयात्रा करने पर मजबूर कर रहे थे| आशा है यूरोपीय संघ इससे निपटने के लिए एकजुट रहेगा| कई जानें इस पर निर्भर करेंगी|”

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Photo credit: EC/ECHO