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Children playing in a tree in Royal Palaceजड़ें जमाने दो (Jaden Jamanen Do), अगर उन्हें मज़बूत दरख़्त बनाना चाहते हो|

 

बच्चों की बेहद चिंता करने वाले अभिभावकों के लिए बोधकथा|

 

जींस पर भरोसा रखो और बालकों को जी लेने दो|

पिछली कहानी: कीवी दौलत घरों में

“उसकी दिशा अगर सही हो जाए, तो वो कुछ बन जाएगा,” रोष ने कहा| “तब मैं चैन से मर सकूँगा|”

“अपनी औलाद पर भरोसा रखो,” ईशा ने उसांस भरी| “जोश में आपके ही जीन्स हैं| वे उसका बेड़ा पार करा देंगे| इस बीच, आपकी दिशा को मदद मिलेगी अगर आप अपने बच्चे के प्रति इतने चिंतित न रहा करो|”

“हर कोई रानी मधुमक्खी नहीं हो सकता| रानी मधुमक्खियों की हमें ज़रूरत है, लेकिन कारीगर मधुमक्खियों की भी तो जरूरत है हमें| उन्हें उनकी नियति पर छोड़ दो| जो बनने के लिए वो पैदा हुए था, वो बन जायेगा वो|”

‘शायद वो बेनाम रहने के लिए ही बना है,’ रोष ने अपने गिलास में उदासी से झाँकते हुए सोचा, उसका मूड खिन्न हो गया था| ‘शायद उससे मेरी उम्मीदें ही यथार्थ से परे हैं!'

'हर कोई प्रतिभाशाली है,’ उसने कहीं पढ़ा था, ‘लेकिन अगर मछली को तुम उसके पेड़ पर चढ़ने की काबलियत पर आंकोगे, तो वो ज़िन्दगी भर यही मान कर जियेगी कि वह नालायक है|'

जिन चीज़ों को हम बदल नहीं सकते, उनके लिए तड़पना बेकार है,” ईशा उससे फिर कह उठी, “और जिन्हें हम बदल सकते हैं, उनके लिए तड़पने की कोई वजह नहीं| आप अपनी ज़िन्दगी जियो| और उसे उसके हाल पर छोड़ दो| वह एक सर्वाइवर है| पहुँच जाएगा!”

रोष ने मुँह परे फेर लिया, और अपनी लाइब्रेरी की खिड़की से बाहर तकता रहा, लेकिन विषाद उसके मन को छोड़ न रहा था| वह उसके पास चली आई तब, और उसके माथा सहलाने लगी|

“WhatsApp पर इना ने एक कहानी भेजी मुझे आज,” उसने कहा| “दो लोगों के बारे में, जो एक बरामदे के दो तरफ, आमने सामने के फ्लैट में रहा करते थे|”

“अब हुआ यूँ, कि परिसर की अपनी-अपनी साइड उन्होंने एक ही वृक्ष की कोपलें लगा डाली थीं| युवा पड़ोसन अपनी कोपलों को खूब सारा खाद-पानी देती| वृद्धा पड़ोसन अपनी कोपलों को थोड़ा ही देती|”

“जल्दी ही, युवा के पौधे पत्तेदार, हरे भरे, मज़बूत हो गए| वृद्धा के पौधे भी सामान्य थे, लेकिन अपने पड़ोसी पौधों से बहुत कम प्रचुर|"

“फिर एक रात, तूफ़ान आया| बरसात धरती पर टूट-टूट कर बरसी, और तेज़ हवा उसका सीना फाड़ गयी| खौफनाक रात थी|”

“अगली सुबह, बाहर हुए नुकसान का मुआयना करने, और सफाई मरम्मत शुरू करने, दोनों पड़ोसने अपने-अपने आश्रय से बाहर निकलीं|”

“नौजवान पड़ोसन यह देख कर दंग रह गयी कि उसके तो सारे पौधे उखड़े पड़े हैं, जबकि उसकी बुज़ुर्ग पड़ोसन के किसी पौधे का भी बाल बांका नहीं हुआ|”

"कमाल है!" वह बुज़ुर्गवार से कह उठी| "भाग्य मेरे पौधों का, जबकि इनकी तो ऐसी अच्छी परवरिश की थी मैंने! तुम्हारे तो सारे बच गए, हालाँकि शायद ही इनकी कभी देखभाल हुई हो|”

"बुज़ुर्ग महिला का जवाब बड़ा अंतर्दृष्टि-भरा था ..." ईशा ने रुक कर, रोष को देखा। "याद रखने लायक सबक|”

वह ध्यान से उसे सुन रहा था, अपने हाथ में थमे ड्रिंक को भुलाकर| ईशा ने आगे कहना जारी रखा:

“देखो लड़की,” बड़ी अम्मा ने छोकरी को जवाब दिया| “तुमने अपने पौधों की हर मुराद पूरी की| तुम इतनी दरिया-दिल थीं, कि उन्हें किसी चीज़ की तलाश में कहीं जाना नहीं पड़ा| तो, उनकी जड़ें कभी गहरे नहीं उतरीं|”

“मैंने उन्हें इतना भर दिया कि वे बने रहें| अपनी बाकी की ज़रूरतों के लिए, उनकी जड़ों को धरती का कलेजा चीर कर उसकी गहराइयों में उतरना पड़ा|”

"क्योंकि तुम्हारे पौधों की जड़ें सतही थीं, तूफ़ान ने उन्हें आसानी से गिरा लिया| क्योंकि मेरे पौधों की जड़ों की पकड़ गहराई तक थी, वे हमला झेल गये|”

“चूँकि अपने पौधों के लिए मैंने वो सब नहीं किया, जो तुमने अपने पौधों के लिए किया, इससे ये सिद्ध नहीं होता कि अपने पौधों के प्रति मैं लापरवाह थी, या कि तुमसे कम उनकी परवाह करती थी| कभी-कभी, थोड़ा ही बहुत होता है!”

अपनी कहानी खत्म कर, ईशा ने उसके कन्धों को हल्के से छुआ| वह हिले-डुले बिना बैठा रहा, जैसे किसी तन्द्रा में हो|

“हमारे बच्चों पर भी यही लागू होता है,” वह दोबारा फुसफुसाई, और संदेसा घर तक पहुँचा आई| “उन्हें वक़्त दो| जड़ें जमाने दो उन्हें| वे लम्बे मज़बूत दरख़्त बनेंगे|”

अगली कहानी: इस कहानी की अगली कड़ी पढ़ें: (प्रकाशन लंबित)