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Another take of hot oil in a potअरेबियन नाइट्स किस्से: अली बाबा और 40 डाकू 15 (Ali Baba Aur 40 Daku 15)

 

अति तप्त तेल, पानी व रेत प्राचीन युद्धों में जानलेवा हथियार थे|

 

मरजीना क्या उपयोग करेगी?

पिछली कहानी: अली बाबा और 40 डाकू 14

“कई प्राचीन युद्धों में उबलता पानी एक सस्ते निवारक की तरह इस्तेमाल किया गया,” रोष ने एक अर्थपूर्ण ठहराव के बाद आगे कहना शुरू किया, “लेकिन योद्धाओं को मारने में तेल बेहतर था|”

“तेल महंगा था, इसलिए आमतौर पर कम इस्तेमाल किया जाता था| लेकिन कई तरह का तेल उच्च तापमान तक गर्म किया जा सकता था और दुश्मन पर फेंका जा सकता था|”

“जोसेफस ने 67 ईस्वी की जोटापाटा की लड़ाई के हुए इसके इस्तेमाल के बारे में बताया है| तेल, उसने लिखा, पूरे शरीर पर सर से पैर तक आसानी से दौड़ जाता था, दुश्मन के पूरे कवच के नीचे, और उसके मांस को आग ही की तरह लील जाता था|”

“पर मरजीना इतना तेल लाएगी कहाँ से,” ईशा ने चिढ़ कर पूछा, “जिससे 37 भरे-पूरे आदमियों को फटाफट फ्राई किया जा सके?”

“और इतने बड़े बर्तन,” जोश ने जोड़ा| वह कल्पना कर रहा था कि मरजीना कैसे लम्बे-तड़ंगे आदमियों को तल कर फ्रेंच फ्राई बना रही है| “दो दर्जन मर्दों के इंतज़ार करते, वह एक दर्जन मर्द तल भी तो नहीं सकती!”

“तेल तो असल में कभी सस्ता रहा ही नहीं,” नन्हे जोश की ज्वलंत मानसिक कल्पनाओं से बेखबर, ईशा ने बात आगे बढ़ाई| “तो लोग आमतौर पर ज़रूरत-भर से ज़रा-सा ही ज़्यादा तेल घर में रखते हैं|”

"लकड़ी का भी ऐसा ही हिसाब है, अगर इसके बजाय वह उन सबको जला कर फूँकने की कोशिश करती है| उसे ढेरों लकड़ी चाहिए होगी|”

“सरदार तेल की एक बैरल लाया है,” होश ने सुझाव दिया| “उन सबके लिए उतना ही काफी होगा| और तेल को खौलाने में उसे उतनी लकड़ी भी ज़रूरत नहीं होगी| शायद उन सबको उनके ही तेल में पका सके वह|”

“सरसों के तेल का फ़्लैश बिंदु ऊँचा होता है - 254 डिग्री सेल्सियस या 489° F (फ़ारेनहाइट)| तो यह बहुत देर तक उनकी त्वचा को जलाता रहेगा| न सिर्फ यह अपनी अधिकतर आँच बहुत तेज़ी से त्वचा को दे ही देगा, बल्कि उस सिकती त्वचा को जल्दी से ठण्डा भी नहीं होने देगा|"

“इसलिए भी तेल को कभी जले पर नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि यह सेक को कैद करने का काम करता है| जले को तुरंत ठंडा करना ठीक होता है| लेकिन चुपड़ा तेल ऐसा होने नहीं देता|”

“तेल अकसर इस्तेमाल होता था,” रोष बोल उठा, “आग लगाने वाले हथियार बनाने में| छठी शताब्दी की रोमन-बीज़ान्टिन फौजों ने बनाये थे ‘तेल-भरे आग के घड़े’, जो हाथ से या बड़े गुलेल यंत्रों से फेंके जा सकते थे|”

“1147 ई की फ्रांस की मोन्त्रेउइल-एन-बेल्ले की घेराबंदी के दौरान, गिरी के तेल, भांग और सन का एक मिश्रण लोहे के बर्तनों में गर्म किया गया था| मेंगोनेल (बड़ी गुलेल) से प्रक्षेपित किये जाने पर, किसी चीज़ से टकराते ही इससे आग की लपटें फूट पड़तीं| चीनियों ने भी तेल में भीगी भांग और कपास से, प्रारंभिक हथगोले बनाये थे, जिन्हें जलाकर मेंगोनेल से फेंका जाता था|”

“डाकुओं को उबालने या गर्म तेल में डीप-फ्राई करने से उनका तुरंत और पूरी तरह नाश तो हो जाएगा| लेकिन इनके उपयोग का सवाल ही नहीं है, क्योंकि तेल सीमित है और 37 योग्य उम्मीदवार हैं, जिन सबको भरपूर सेवा की एकदम ज़रूरत है।"

“सभी बैरलों को एकदम जलाकर, सबको एक साथ ज़िन्दा जलाया जा नहीं सकता, क्योंकि समय और लकड़ी का अभाव है| उनपर अति तप्त (सुपर गर्म) तेल डालना एक व्यवहारिक विकल्प है, लेकिन रिस्की है क्योंकि बच निकलने के लिए उनके बैरल तोड़ कर बाहर आना शुरू होने से पहले भी, वह समय के खिलाफ ही दौड़ रही होगी|”

“सही,” ईशा ने माना| “लेकिन ऊँचे तापमान तक गर्म किया गया तेल खतरनाक और अस्थिर हो जाता है| इसमें आग लग सकती है, ये धुआँ सकता है| क्योंकि तेल का स्मोकिंग पॉइंट (जब तेल धुआँता है) इसके बोइलिंग पोइंट (जब तेल उबलता है) से कम होता है, इसलिए इसे केवल गर्म किया जाता है, कभी उबाला नहीं जाता|”

“तेल धुँआने लगे, तो इसे आंच से तुरंत उतार लेना चाहिए, कि कहीं इसमें आग न लग जाए| इसी कारण, घर पर खाना पकाते हुए अगर चूल्हे पर तेल गर्म हो रहा हो, तो उसे कभी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए|”

"तपती रेत,” रोष ने एक और विकल्प की पेशकश की, "यहाँ तक कि रास्ते की धूल भी, बहुत सस्ती और असरदार हो सकती है| कवच के छोटे से छोटे छेदों में से घुसकर ये भयानक रूप से जला सकती है|”

“रेत?" जोश ने हैरत से पूछा| "सच?"

"हाँ," रोष ने कहा| "332 ईसा पूर्व में टायर (अब लेबनान में) की सिकंदर द्वारा की गयी सात महीने लम्बी घेराबंदी में, फिनिशियनों ने हमलावर यूनानियों पर जलती रेत गिरा कर, जो उनके कवच के अन्दर घुस गयी थी, उन्हें बुरी तरह जला दिया था|”

"दिओदोरस सिकुलस ने लिखा है कि फिनिशियनों (Phoenicians) ने पीतल के बड़े उथले कटोरों में महीन रेत गर्म की| फिर उन्होंने सिकंदर के सैनिकों पर ये लाल-गर्म रेत या तो गिराई या गुलेल से उड़ा कर बिखराई... कवच को बेधती ये कमीज़ों में घुस गयी, और शरीर जल गए| कोई मदद नहीं की जा सकी| वे मर गए, भयानक दर्द से पागल हो होकर|"

"किसी भी अति तप्त चीज़ से बहुत देर तक जलन,” होश सहमत था, “त्वचा को चौथी डिग्री के दाह तक जला सकती है| एपिडर्मिस और डर्मिस नष्ट हो जाते हैं, जिससे त्वचा के नीचे की वसा (subcutaneous fat) पूरी तरह बर्बाद हो जाती है| अंततः ताप मांसपेशी को उघाड़ देता है, जिससे प्रमुख धमनियाँ और नसें भंग हो जाती हैं|"

"तो ठीक है,” जोश ने अपना फैसला सुना दिया| “वो उन सब पर उबलती रेत डालने वाली है| किया उसने ऐसा असल में, पा?”

"नहीं," रोष ने अपना सिर हिलाया और अरेबियन नाइट्स की कहानी सुनानी जारी रखी, “मरजीना ने शोरबा आग से उतार लिया, और मरणासन्न लपटों को हवा दी| एक बार जब वे फिर से प्रचण्ड हो लपकने लगीं, तो उसने और लकड़ियाँ उनमें डाल दीं|”

“तब उसने अपना सबसे बड़ा देग आग पर चढ़ा दिया| फिर हैंडल वाला अपना सबसे बड़ा पात्र लेकर, वह दबे पाँव डाकुओं की तेल की बैरल तक चली आई|”

“अहा,” जोश चिल्लाया| “वह इन भूतनी वालों पर उबलता तेल डालने जा रही है| रेत नहीं! मैं जानता था|”

“शश!” रोष ने चेतावनी दी| "इतना चिल्ला कर तुम लुटेरों को अलर्ट कर दोगे| और अपनी ज़ुबान सम्भालो| मरजीना को अपना ध्यान केंद्रित करने दो| उसे पूरी खामोशी की ज़रूरत है|”

"आप मरजीना हो?” जोश ने पूछा|

"नहीं," रोष ने कहा। "मैं नहीं हूँ| लेकिन मैं तुम्हें ये तो नहीं बता सकता न कि उसने क्या किया, अगर तुम यूँ ही अचानक चिल्ला-चिल्ला कर मुझे चौंकाते रहोगे|”

जोश रजाई के नीचे दुबक गया, और जितना अन्दर जा सकता था, उतना गहरा उसमें घुस गया| रोष ने कहना जारी रखा, “अपनी हंडिया बैरल में डुबो कर, मरजीना ने उसे तेल से भर लिया, और उसे तपते हंडे के पास वापिस ले आई| वो सारा तेल उसने देग में पलट दिया|”

“दोबारा, वह बैरल के पास लौटी, अपनी हंडिया भरी, देग के पास लौटी और हंडिया उसमें पलट दी| इस तरह उसने कई चक्कर लगाये और देग तब तक भरती रही जब तक वह पूरी तरह भर नहीं गया|”

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