आध्यात्मिक कहानियाँ
सिक्के के दो पहलु - हेड व टेल की तरह, आदमी के भी दो पहलु होते हैं - अच्छाई और बुराई|
अच्छे-बुरे लोग नहीं होते, अच्छी-बुरी हमारी नज़र होती है|
बोधकथा: माँ-बाप का कर्ज़
क्या ये कभी चुकाया नहीं जा सकता?
कैसा है ये पितृ-ऋण, जो आम आदमी माता-पिता की सच्ची सेवा से भी चुका नहीं पाता?
रूहानी कहानी: एक देस बहुत दूर
पंजाबी लोकगीत ‘छल्ला’ के विभिन्न संस्करणों से छंदों का अनुवाद और जीवन व आध्यात्मिकता के सन्दर्भ में समीक्षा
बोधकथा: जागृति
जागती वाईताकरे पर्वतमाला को देखता, होश सोचता है कि क्या ये प्यार नहीं जो हमें शान्ति दिलाता है, अपने आस-पास बिखरे अजूबे दिखाता है?
हमन की दुनिया से क्या यारी, कबीर सिखाते हैं, हमन हैं इश्क मस्ताना|
बेड़ा पार तो इश्क ही करायेगा, पर राह नाज़ुक है ज़िन्दगी की|
तो कैसे चलें?
चार मोमबत्तियाँ जीवन को प्रकाशमान किये थीं|
तीन के बुझने से अँधेरा बढ़ा तो बालक डर गया|
लेकिन आशा बाकी थी, जिसने शान्ति, विश्वास व प्रेम को...
बोधकथा: ये भी रहेगा नहीं
शाकिर ने फकीर को सिखा दिया कि इंसान के वक़्त का उसकी नेकी बदी से कोई लेना देना नहीं|
वक़्त का काम है बदलना|
महानता की झलक सिर्फ प्राचीन अवतारों और प्रसिद्ध नेताओं में ही नहीं, बल्कि हमारे चारों तरफ देखी जा सकती है|
आवश्यकता और अवसर आम लोगों को हीरो बना देते हैं|
फिल्म आनंदमठ के गीत 'जय जगदीश हरे' के बोलों का ऐतिहासिक, अध्यात्मिक व व्यावहारिक अर्थ|
अपना जीवन कैसे जियें आज?
आस्था सहित, निर्भय कर्म करते!
यदि मंज़िल पाए बिना जाना, जीवन व्यर्थ हो जाना है, तो ध्येय पाकर जाना भी तो जाना ही है|
क्या जीवन के कर्म-चेष्टा, रेत के घरौंदे बनाने जैसे हैं बस?
हिन्दी कहानियाँ
English Stories
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