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Sniper Elite V2 - Churchमार्मिक कथा: निशानची (Nishanchi)

 

आयरिश रिपब्लिकन और फ्री स्टेटर्स के बीच 1920 के दशक में हुए गृहयुद्ध पर लियम ओ’फ्लेहेर्टी की कहानी ‘द स्नाइपर’ का हिंदी अनुवाद

पिछली टेलटाउन कहानी: खीरे का रायता

“क्या हो रहा है?” अपने बेटे के कमरे में घुसते हुए रोष ने पूछा|

“अभी-अभी अपना स्कूल असाइनमेंट लिख कर पूरा ही किया है,” जोश ने कहा| “आयरिश लेखक लियम ओ फ्लेहेर्टी की कहानी ‘द स्नाइपर’ पर मेरे विचार| पढ़ी है आपने? मार्मिक कथा है|”

“वाकई?” रोष ने पूछा| “नहीं, मैंने नहीं पढ़ी| पढ़ी भी हो, तो अब याद कतई नहीं है| किस बारे में है?”

“इतनी अच्छी है कि सारांश करने लायक नहीं है,” जोश ने कहा| “आपको पढ़ के सुना देता हूँ मैं| फिर शायद उसके बारे में चर्चा भी कर सकते हैं हम, अगर आपको फुर्सत हो तो|”

रोष अपने बेटे के बिस्तरे में घुसकर आराम से पसर गया| आज मार्मिक कहानियों के मूड में था वह| और चाहे जो हो, अपने बेटे के लिए फुर्सत तो वो निकाल ही सकता था|

अपने पिता की शारीरिक भाषा जोश समझ गया, मुस्कुराया, और लियम की कहानी के कागज़ उठा लिए उसने| अपने पिता के लिए उसने इन्हें ज़ोर से पढ़ना शुरू कर दिया:

जून की लम्बी गोधूलि रात में ओझल हो गयी| रोयेंदार बादलों से छनती चाँद की मद्धिम रोशनी के अलावा डब्लिन अंधेरे में घिरा था| मंद चाँदनी सड़कों और लिफ्फे नदी के श्यामल पानी पर आगामी भोर के हल्के उजाले सी प्रतीत होती थी| घिरे फोर स्कोऐर के आसपास भारी बंदूकें चिंघाड़ रही थीं|

सारे शहर में यहाँ-वहाँ, रह-रह कर मशीनगनों और राइफलों की आवाज़ें रात की ख़ामोशी तोड़ देतीं, जैसे अकेले खेतों में कुत्ते भौंक रहे हों| रिपब्लिकन और फ्री स्टेटर्स (मुक्त राज्य वादी) गृहयुद्ध लड़ रहे थे|

ओ’कोन्नेल ब्रिज के पास एक छत पर, एक रिपब्लिकन निशानची लेट कर आसपास नज़र रखे था| उसकी रायफल उसकी बगल में पड़ी थी और कंधे से दूरबीन लटक रही थी| उसका चेहरा एक छात्र का चेहरा था, पतला और तपस्वी, लेकिन उसकी आँखों में कट्टरता की ठंडी चमक थी| वे गहरी और विचारशील थीं, ऐसे आदमी की आँखें जो मौत देखने का आदी हो|

वो बेसब्री से एक सैंडविच खा रहा था| सवेरे से उसने कुछ नहीं खाया था| उत्तेजना में भूख उसे महसूस ही न हुई थी| उसने सैंडविच खत्म किया, और अपनी जेब से व्हिस्की का फ्लास्क निकाल कर, एक छोटा घूँट भरा| फिर उसने फ्लास्क अपनी जेब में वापिस रख लिया| एक पल के लिए वह रुका, ये तोलता कि सिगरेट का जोखिम उठाने लायक है कि नहीं| खतरनाक तो था| फ्लास्क अँधेरे में दिखाई दे सकता था, और दुश्मन टोह में तो थे ही| उसने खतरा मोल लेने का फैसला कर लिया|

अपने ओठों के बीच एक सिगरेट लगाकर, उसने तिल्ली जलाई, तेज़ी से एक कश लिया और तीली बुझा दी| लगभग तुरंत ही, एक गोली छत के परकोटे से टकरा कर चपटा गई| निशानेबाज़ ने एक और कश खींचा और सिगरेट बुझा दी| फिर दबी आवाज़ में कोस कर वह बाईं ओर रेंग गया|

सावधानी से उसने खुद को उठाया और मुंडेर के ऊपर झाँका| बिजली चमकी और एक गोली उसके सिर के ऊपर से निकल गयी| वह तुरंत धँस गया| फ़्लैश उसने देख लिया था| वो सड़क पार से हुआ था|

वो छत पर पीछे की एक चिमनी की ओट तक लुढ़क आया, और धीरे-धीरे खुद को उसके पीछे खींच कर उठा, जब तक कि उसकी आँखें प्राचीर के शीर्ष के स्तर तक नहीं आ गयीं|

देखने को कुछ नहीं था – सिर्फ नीले आसमान की पृष्ठभूमि में, सामने वाले घर की छत की मद्धिम रूपरेखा| दुश्मन छिपा हुआ था|

उसी वक़्त एक बख्तरबंद गाड़ी पुल के ऊपर से आई और सड़क पर धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी| वह सड़क की परली ओर आकर रुक गयी, पचास गज़ दूर| स्नाइपर मोटर का सुस्त हाँफना सुन सकता था|

उसके दिल की धड़कन तेज़ हो गयी| गाड़ी दुश्मन की थी| वह फायर करना चाहता था, लेकिन जानता था कि सब बेकार होगा| उसकी गोलियाँ कभी उस सलेटी दानव के स्टील कवच को भेद नहीं पाएँगी|

तभी बगल की गली से एक बूढ़ी औरत निकल आई, जिसका सिर एक फटी शॉल से ढका था| वह गाड़ी के बुर्ज़ में एक आदमी से बात करने लगी| वह उस छत की तरफ इशारा कर रही थी, जहाँ स्नाइपर लेटा था| मुखबिर!

बुर्ज़ खुला| निशानची की ओर देखते एक आदमी का सर और कन्धा नज़र आये| निशानेबाज़ ने अपनी राइफल उठाई और गोली दाग दी| सिर बुर्ज़ की दीवार पर भारी होकर ढह गया| औरत बगल वाली गली की ओर दौड़ी| स्नाइपर ने फिर फायर किया| औरत चकराई, और चीखती हुई नाली में गिर पड़ी|

अचानक सामने वाली छत से गोली छूटने की आवाज़ आई और स्नाइपर ने गाली बकते हुए राइफल छोड़ दी| राइफल छत पर खड़खड़ा के गिरी| निशानची को लगा कि ऐसे शोर ने तो मुर्दों को भी जगा दिया होगा| उसने झुक कर राइफल उठाने की कोशिश की| उठा नहीं पाया| उसकी कलाई मर चुकी थी|

“मुझे लग गयी,” वह बड़बड़ाया|

छत पर सपाट गिरकर, वह परकोटे की ओर वापिस रेंग गया| अपने बाएँ हाथ से उसने अपनी घायल दायीं कलाई को छुआ| उसके कोट की आस्तीन से खून बह रहा था| कोई दर्द नहीं था, बस एक मुर्दा एहसास, जैसे बाँह काट दी गयी हो|

तेज़ी से उसने अपनी जेब से चाकू निकाला, परकोटे की छाती पे अटका के खोला, और आस्तीन चीर दी| जहाँ से गोली घुसी थी, वहाँ एक छोटा छेद था| दूसरी तरफ कोई छेद नहीं था| बुलेट हड्डी में ठहर गयी थी| उसने उसे फ्रैक्चर कर दिया होगा| उसने ज़ख्म के नीचे की बाँह मोड़ी| बाज़ू आराम से पीछे मुड़ गयी| दर्द पर काबू पाने के लिए उसने अपने दांत भींच लिए|

फिर अपनी फील्ड ड्रेसिंग निकाल कर, उसने चाकू से पैकेट फाड़ दिया| आयोडीन की शीशी की गर्दन तोड़कर उसने कड़वा तरल घाव में टपकने दिया| दर्द की एक लहर उसे झकझोर गयी| कपास का फाहा घाव पर रखकर उसने पट्टी से उसे लपेट दिया| सिरों को दाँतों से खींचकर उसने गाँठ बाँध ली|

फिर मुंडेर से सटकर वह शांत लेट गया, और आँखें बंद करके, दर्द पर काबू पाने की कोशिश करने लगा|

नीचे की सड़क पर सब शांत था| बख्तरबंद गाड़ी मशीन गनर के बुर्ज़ पर लटकते निर्जीव सिर को लिए, तेज़ी से पुल के ऊपर से लौट गयी थी| गटर में औरत का शव शान्त पड़ा था|

निशानची बहुत देर तक अपनी ज़ख्मी बाँह सहलाता, और बच निकलने की राह सोचता, चुपचाप पड़ा रहा| सुबह उसे छत पर घायल नहीं मिलना चाहिए| पर सामने वाली छत का दुश्मन उसके भागने का रास्ता कवर किये बैठा था| उस दुश्मन को मारना होगा, और वह अपनी राइफल इस्तेमाल नहीं कर सकता था| इस काम के लिए सिर्फ एक रिवॉल्वर थी उसके पास| तब उसने एक तरकीब सोची|

अपनी टोपी उतार कर, उसने राइफल के मुँह पर रख दी| फिर राइफल को धीरे-धीरे ऊपर उठाकर परकोटे के ऊपर करता गया, जब तक कि टोपी सड़क के परली ओर से दिखने नहीं लगी|

लगभग तुरंत एक गूँज हुई, और एक गोली कैप को बीचो-बीच से छेद गयी| स्नाइपर ने राइफल आगे झुका दी| कैप सड़क में जा गिरी|

तब राइफल को बीच से थामे, निशानची ने अपना बायाँ हाथ छत के ऊपर से गिरा दिया, और उसे वहां बेजान-सा लटकने दिया| कुछ पल बाद उसने राइफल सड़क में गिर जाने दी| फिर वह छत पर ढह गया, हाथ उसके साथ-साथ नीचे घिसट आया|

अपने पैरों पर तेज़ी से रेंगते हुए, छत के किनारे पहुँच कर उसने ऊपर झाँका| उसकी तरकीब काम कर गयी थी| टोपी और राइफल गिरते देख, दूसरे निशानेबाज़ को लगा था कि उसने निशानची को मार दिया है| चिमनी नलियों की एक कतार के आगे खड़ा, वो अब सामने ताक रहा था| पश्चिमी आसमान की पृष्ठभूमि पर उसकी खोपड़ी की छाया साफ दिखाई दे रही थी|

रिपब्लिकन स्नाइपर मुस्कुराया और उसने अपनी रिवाल्वर परकोटे के किनारे से ऊपर की| लगभग पचास गज़ का फासला था – मद्धिम रोशनी में कर पाना मुश्किल, और उसका दायाँ हाथ उसे हज़ार शैतानों की तरह दुखा रहा था| उसने स्थिर निशाना लगाया| उसका हाथ उत्सुकता से कंपकंपा रहा था| अपने होंठ भींचकर, उसने नाक से एक लम्बी सांस ली और फायर कर दिया| उसकी आवाज़ ने लगभग बहरा कर दिया उसे और झटके ने बाँह झनझना दी|

फिर, जब धुआं छटा और उसने परली ओर घूरा, तो मारे ख़ुशी के चीख पड़ा| उसके दुश्मन को गोली लग गयी थी| परकोटे के ऊपर वह मौत की पीड़ा से झूम रहा था| अपने पाँव पर खड़े रहने की कोशिश कर रहा था वह, पर आगे की ओर धीरे-धीरे ऐसे गिर रहा था जैसे किसी सपने में हो| राइफल उसकी पकड़ से छूट गयी, परकोटे पर लगी, आगे गिरी, और नीचे नाई की दुकान के खम्भे से टकरा कर, फुटपाथ पर खड़खड़ा कर जा गिरी|

फिर छत पर मरता वो आदमी दोहरा होकर आगे की ओर गिर पड़ा| हवा में गुलाटी खाता हुआ उसका शरीर ज़मीन पर धम्म से जा गिरा| और वहीं शांत पड़ गया|

अपने दुश्मन को गिरता देख कर निशानची काँप उठा| युद्ध की लालसा उसमें मर गयी| वह ग्लानि से भर गया|

उसके माथे पर पसीने की मोटी-मोटी बूँदें चुहचुहा आईं| अपने घाव, और गर्मी के लम्बे दिन में उपवास और छत पर निगाह जमाये बैठे रहने से कमज़ोर पड़ चुका था वह| ऐसे में अपने मृत शत्रु के फूटे लोथड़े को देखकर उसका माथा फिर गया| उसके दांत बज उठे| वह अपने आप से बड़बड़ाने लगा, युद्ध को कोसता, खुद को कोसता, सब को कोसता|

अपने हाथ में धुआँती रिवाल्वर देखकर उसने कसम खाई, और छत पर अपने कदमों के पास ही उसे दे मारा| झटके से रिवाल्वर चल गयी और एक गोली निशानची की खोपड़ी के पास से निकल गयी| सदमे से डरकर उसके होश ठिकाने आ गए| जोश थम गया| उसके मन से डर की बदली छट गयी, और वह हँस पड़ा|

“हाँ,” रोष ने टोका| “स्नाइपर का काम बहुत तनाव भरा है| प्लान बनाना| इंतज़ार| युद्ध के बीच में| ये जाने बिना कि अगली गोली कहाँ से आने वाली है| खासकर कि जब तुम्हें पता हो कि तुम्हारा दुश्मन भी एक निशानेबाज़ है| खतरनाक, सशस्त्र, और तुम्हें मारने पर आमादा!”

“मुझे याद है कितना तनाव और व्यग्रता स्पेनिश कलाकार अंतोनियो बान्देरास ने फिल्म ‘असासिन’ में अपने यादगार प्रदर्शन में दिखाई थी, जब वह एक उजड़ी इमारत की खिड़की में स्नाइपर मिगुएल बेन बनकर छिपा बैठा, नीचे की सड़क पर अपने प्रतिद्वंद्वी स्नाइपर को मारने की इंतज़ार कर रहा था|”

जोश ने चुपचाप सुना, और जब रोष ने और कुछ नहीं कहा, तो पढ़ना जारी रखा:

अपनी जेब से व्हिस्की का फ्लास्क निकाल कर, उसने उसे एक घूँट में खाली कर दिया| शराब के नशे में एक बेफिक्री महसूस हुई उसे| उसने अब छत छोड़कर, कंपनी कमांडर को अपनी रिपोर्ट देने के लिए, उसे ढूँढने की ठानी|

आसपास हर जगह शान्ति थी| सड़कों पर जाने में ज़्यादा खतरा नहीं था| उसने अपना रिवॉल्वर उठाकर अपनी जेब में डाल लिया| फिर वह बिजली के झरोखे में रेंगता हुआ नीचे के घर में पहुँच गया|

सड़क तल वाली गली तक पहुँचते-पहुँचते, उसे अचानक उस दुश्मन स्नाइपर की शिनाख्त करने की जिज्ञासा जागी, जिसे उसने मार दिया था| उसने फैसला किया कि वो जो भी था, एक बढ़िया निशानेबाज़ था| क्या वह जानता था उसे, उसने सोचा? शायद सेना के बटवारे से पहले वह उसी की टुकड़ी का रहा हो|

उसे देखने के लिए वहाँ जाने का जोखिम उठाने का निश्चय कर लिया उसने| ओ’कोनेल स्ट्रीट के किनारे पहुँचकर उसने कोने के उस पार झाँका| सड़क में ऊपर की ओर भारी गोलीबारी हो रही थी, लेकिन यहाँ सब शांत था|

निशानची सड़क पार दौड़ पड़ा| एक मशीन गन ने गोलियों की बौछार से उसके आसपास की ज़मीन उधेड़ दी, लेकिन वह बच गया| सिर नीचा किये, खुद को लाश के पास की ज़मीन पर फेंक दिया उसने| मशीन गन रुक गयी|

निशानची ने शव को पलट दिया और तब अपने भाई के चेहरे पर उसकी नज़र पड़ी|

नोट: लियम ओ'फ्लाहेर्टी की लिखी ‘स्नाइपर’ सार्वजनिक डोमेन में है|

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