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Diamond cakeरोमांचक कहानी: हीरे की चोरी 1 (Heere Ki Chori 1)

 

ज़बरदस्त संरक्षण व सुरक्षा उपायों के बावजूद 'नूर' चुराया गया।

 

क्या दक्षिण अफ्रीकी एससीबी इस अपराध को हल कर सकेगी?

पिछली टेलटाउन कहानी: पढ़ें इस किस्से से पहले की कथा: महामूर्ख छोरा | Mahamoorkh Chhora (अभी अप्रकाशित)

“पा,” होश ने कहा| “कॉलेज मैगज़ीन के लिए मैं एक कहानी भेज रहा हूँ| क्या आप उसे पढ़ कर चेक कर सकते हो प्लीज़?”

“ज़रूर,” रोष ने अपनी कुर्सी अपने बेटे की ओर घुमाते हुए कहा|

होश ने उसे कागज़ के छह पन्ने थमा दिए| वे बड़े करीने से टाइप किये हुए थे|

रोष ने अपनी मेज़ पर रखे कागजों को सरका कर जगह बनायी, जबकि होश अपने पिता के पास बैठने के लिए अपनी कुर्सी आगे सरका लाया| रोष पढ़ने लगा...

“सबको हेल्लो| मैं हूँ मिस्टर पटेल – आज के लिए तुम्हारा सुरक्षा प्रमुख,” पटेल ने हीरे के सुरक्षा-कर्मियों से नेकदिली से हँसते हुए कहा|

उसने अनौपचारिक कपड़े पहने हुए थे, और वो किसी भी चीज़ का प्रमुख नहीं लगता था| एक सुरक्षा-प्रमुख से रौबीले होने की उम्मीद-सी तो होती ही है|

उसके बाल काले, मुस्कान सरल, त्वचा मटमैली और काठी नाज़ुक सी थी| उसने धूप का काला चश्मा, गले में एक पतली सोने की चेन, हल्की नीली पोलो शर्ट, नीली जीन्स और ट्रेनर जूते पहन रखे थे|

“सुरक्षा-प्रमुख?” एक गार्ड ने सकपका कर पूछा|

“मिस्टर खान की जगह, जो आज यहाँ आ नहीं पायेंगे,” पटेल ने मिलनसारी से जवाब दिया|

“हमें कुछ नहीं पता इस बारे में!” दूसरा भुनभुनाया|

“मि. खान का मेमो नहीं मिला तुम्हें?” पटेल हैरान लगा|

हीरे के गार्ड ने मखौल उड़ाते हुए, दबी ज़बान में दूसरे गार्ड से फुसफुसाकर कुछ कहा| दोनों खिलखिला उठे|

पटेल ने असहज महसूस किया| उसने डरबन हेड ऑफिस फोन लगाया, और सौभाग्य से मामला जल्दी सुलट गया| उससे थोड़ा और खेलने का अवसर गँवा कर गार्ड लगभग खेद से कराह उठे|

“वर्दी में होते तो बवाल नहीं होता,” एक ने पटेल को आखिरी ताना मारा| “यहाँ लड़कियाँ नहीं हैं रंग जमाने के लिए!”

“मेरे कपड़ों में कुछ गड़बड़ है?” पटेल फुफकार उठा, “या मेरे चश्मे में?”

अपना पारा बढ़ता महसूस कर सकता था वह|

देखने में ज़रा हास्यपूर्ण लगता था एक अदना-से पृथ्वी वासी का दो दानवों पर आग उगलना, पर उन्होंने पलट कर कोई जवाब नहीं दिया|

‘मेरा चश्मा तो असल में बहुत उपयोगी है,’ उसने उन्हें घूरते हुए सोचा| ‘ये न सिर्फ मेरी आँखों को नुकसानदायक अल्ट्रा वायलेट किरणों से बचाता है, बल्कि जब तक मैं न चाहूँ, इन्हें लोगों की नज़रों से भी ओझल रखता है| पेशेवर कारण, जो तुम गंवार कभी नहीं समझोगे|’

गार्ड आखिरकार मुड़ कर भीतर चले गए| पटेल उनके पीछे-पीछे अन्दर चला आया|

“तुममें से ब्योरा कौन देगा मुझे?” ठोस काँच के रिसेप्शन काउंटर पर थोड़ा झुकते हुए उसने पूछा| “उस पत्थर के बारे में, जिसकी हिफाज़त का जिम्मा है हमारा| उसकी सुरक्षा व्यवस्था के बारे में|”

एक सुरक्षाकर्मी ने खंखार कर गला साफ किया, और सुलह करने की सोची| वे सब यहाँ अपनी नौकरी बजाने आये थे, और बॉस को परेशान करना समझदारी नहीं थी|

“मैं, मिस्टर लुट्टू,” उसने अपना परिचय दिया| फिर अपने साथी की ओर इशारा करते हुए बोला, “वो, मिस्टर प्रिंगल|”

“मिलकर अच्छा लगा, लुट्टू,” पटेल ने ‘मिस्टर’ का इस्तेमाल नहीं किया, पर उससे हाथ मिलाने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया|

गार्ड ने भी मुस्कुरा कर उसका हाथ थाम लिया| दोनों ने हाथ मिलाया, वैमनस्य ख़त्म हो गया|

“डायमंड का नाम है ‘नूर’,” लुट्टू ने कहा| “बेशकीमती हीरा| बेहतरीन तराशा हुआ| बहुत बड़ा| हीरों के बारे में ज़्यादा कुछ जानते हो आप?”

“हल्का फुल्का,” पटेल ने ईमानदारी से कहा| “मुहब्बत है इनसे, पर एक और तेज़ सबक में कोई हर्ज़ नहीं|”

वह जानता था कि उर्दू में ‘नूर’ का मतलब ‘प्रकाश’ होता है| अलसाए से, उसने 1905 में साउथ अफ्रीका में मिले सबसे बड़ा हीरे, 3,106 कैरेट के ‘कलिनन डायमंड’ के बारे में सोचा|

उसमें से काट कर बनाया गया था ‘अफ्रीका का पहला सितारा’, जो अब अंग्रेज़ी राजदण्ड में जड़ा था - ब्रिटिश सम्राट के जवाहरात में से एक, जो अब लंदन टॉवर में प्रदर्शित था|

लुट्टू ने रिसेप्शन काउंटर के ऊपर लगे वर्चुअल मॉनिटर को चालू करके, उसके लिए एक छोटी फिल्म चला दी|

विडियो देखने के बाद, लुट्टू की दी हुई सूचनाएँ सोखता, पटेल ठोस कांच पर लगातार तबला बजाये जा रहा था| इस जानकारी की ज़रूरत नहीं थी उसे| वो अपनी तैयारी करके आया था, लेकिन जिन लोगों के साथ काम करना हो, उनका आकलन कर लेने में भी कोई हर्ज़ नहीं था|

“ठोकने से कुछ फायदा नहीं,” लुट्टू ने अपनी गड्ड-मड्ड रिपोर्ट के अंत तक पहुँचते हुए एक मज़ाकिया टिप्पणी की| “वो कांच बुलेट-प्रूफ है|”

“हाँ,” पटेल मुस्कुराया और उसने शीशे पर ताल ठोकनी बंद कर दी| उसे ये आदमी पसंद आने लगा था|

“सिक्योरिटी कैमरे वगैरह के बारे में बताने की ज़रूरत नहीं, उनके बारे में मैं जानता हूँ| मुझे कक्के (कंप्यूटर कमांड केंद्र) ले चलो|”

नूर को दुर्ग के एक बड़े कमरे में रखा गया था, और मानवीय सुरक्षाकर्मी तो ज़्यादातर दिखावे के लिए थे| अन्दर और बाहर कैमरों की आँखें सब देख रही थीं, क्योंकि उन्हें चुनिन्दा जगहों पर होशियारी से लगाया गया था| बड़े कैमरे स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर थे और बहुत महीन कैमरे बेहतरीन ढंग से छुपे हुए|

लुट्टू ने हामी भरी, सुरक्षा व्यवस्था का विवरण देना बंद किया, और पटेल को अन्दर ले चला|

“अन्दर,” उसने चेतावनी दी, “इन्फ्रारेड लाइट और अलार्म से जुड़े हैं सेंसर| इधर अलार्म बजा, उधर लेज़र चले| लेसर आदमी को अँधा कर सकता है, अगर लाइट में सीधा देख लो| नूर का काँच कवर टूटने पर बिजली का ज़बरदस्त झटका| इधर हीरा उठाया, उधर दरवाज़े लॉक हुए| कोई बाहर नहीं निकल सकता, जब तक कि एससीबी (स्पेशल क्राइम ब्रिगेड) न आ जाए|”

“बहुत बढ़िया,” पटेल बोला| चलते हुए वह हर चीज़ को बारीकी से देखता, किसी मानसिक चेकलिस्ट पर उन्हें आंकता जा रहा था| “तब तो कोई चोर नहीं बच पायेगा| अब मैं कण्ट्रोल रूम और एयरकंडीशनिंग रूम में जा कर बिजली सर्किट बोर्डों की जांच करूँगा| तुमसे मैं बाद में मिलता हूँ|”

लुट्टू ने अपना वॉकी-टॉकी पटेल को सौंप दिया|

“ये ले लो,” उसने पेशकश की| “मैं मिस्टर प्रिंगल के साथ बाँट लूँगा| मिस्टर खान का टाकी तो उनके लॉकर में बंद पड़ा है, सॉरी आपको वो दे नहीं सकता|”

उसका वाकी-टाकी आम बनावट का था| डायल करने के लिए उसमें मोबाइल की तरह कोई नंबर नहीं थे| सिर्फ एक बटन, जिसे बोलते हुए दबाये रहो| सुनने के लिए बटन छोड़ दो, आटोमैटिक फ्रीक्वेंसी एडजस्ट| पटेल ने उसे शुक्रिया कहा, और उसमें बोलकर प्रिंगल को बता दिया कि ज़रुरत पड़े तो वो कहाँ मिलेगा|

दूसरे छोर से प्रिंगल बस घुरघुरा दिया| लुट्टू पटेल को अकेला छोड़, प्रिंगल के पास अपनी पोज़ीशन लेने वापिस पहुँच गया|

पटेल ने रेफ्रिजरेशन रूम का दौरा किया और बिजली के सर्किट जांचे| उसने काफी समय वहाँ बिताया| इससे पहले कि उसका काम वहाँ खत्म होता, दुर्ग की शांत ख़ामोशी अचानक अलार्म बज उठने से टूट गयी|

“मिस्टर पटेल!” लुट्टू की घबराई आवाज़ वॉकी-टॉकी से गूँज उठी| “गढ़ी से बाहर निकलिए| जल्दी| आग!”

“ओके,” पटेल गुर्राया| “सर ज़ुबिन को सुरक्षित निकालो! मैं बाहर आ रहा हूँ|”

दुर्ग के मैदान में जल्दी ही एक भीड़ जमा हो गयी| कई लोग खाँस रहे थे| सर जुबिन को हिफाज़त से बाहर निकाल लिया गया था, और अब दुर्ग की नर्सें उनकी देखभाल कर रहीं थीं|

अग्नि-शमन वालों ने जल्दी ही आग बुझा दी| लेकिन गाढ़ा, काला धुआँ अभी भी उस खंड से उमड़ रहा था जहाँ बिजली की सर्किटरी रखी थी|

एससीबी घटना-स्थल पर पहुँच चुकी थी, और सुराग पाने परिसर को छान रही थी| स्थानीय पुलिस और सादे कपड़ों में जासूस इधर-उधर घूम रहे थे, अपनी बारी आने का संतोषपूर्वक इंतज़ार करते|

जल्द ही, एससीबी का मुख्य जासूस सर जुबिन को रिपोर्ट देने आया|

"हीरा सुरक्षित है?" सर जुबिन चिंता से व्याकुल हो रहे थे| "आग कैसे लगी?”

"सर," मुख्य जासूस ने गंभीरता से कहा| "हीरा गायब है!"

"क्या!" सर ज़ुबिन का रंग तेज़ी से उतरने लगा| “कैसे?”

“विद्युत सर्किट बोर्डों में शॉर्ट-सर्किट से आग लगी,” मुख्य जासूस ने उत्तर दिया| “जिससे कक्के का फ्यूज़ भी उड़ गया| बैकप जनरेटर आज दिन में पहले ही बंद किया जा चुका था पूर्व-नियोजित रख-रखाव के लिए, इसलिए बिजली थी नहीं|”

“क्रैप!” जुबिन भड़क उठा| “नवीनतम प्रणालियाँ| अभेद्य किला| दक्षिण अफ्रीका की सर्वोत्कृष्ट निजी सुरक्षा कंपनी| अजेय एससीबी| और सेंसर, अलार्म, लेज़र, कैमरों, इन्फ्रारेड, अटूट शीशों और अत्याधुनिक तकनीकों की भीड़ ... "

“बिजली से चलने वाली हर चीज़ को बिजली चाहिए,” मुख्य जासूस ने शांति से जवाब दिया| “तो वे बेकार हो गए| आग का अलार्म बजने से गार्डों को भी अपने स्थानों से हटना पड़ा|”

“क्रैप!” जुबिन अपराध की असम्भवता से जूझता हुआ, अभी भी आग बबूला हो रहा था| “तुम सर्वश्रेष्ठ थे| बेजोड़| क्या इतना ही ढूँढ पाए अब तक? और कोई सुराग नहीं? नूर का अपना अलार्म क्या हुआ?”

“फायर अलार्म की आवाज़ में दब गया,” मुख्य जासूस ने धैर्यपूर्वक जवाब दिया| “लेकिन इन्फ्रारेड सेंसर से चोर कैसे बचा ये अभी रहस्य ही है| हम जाँच कर रहे हैं| आपको सूचित करते रहेंगे|”

“चोर का क्या?” बात करने की कोशिश में, खंखार जुबिन के बिगड़ते चेहरे से छूट पड़ा| “उसपर कुछ? मर्द है कि औरत? एक है कि ज़्यादा हैं? होंगे ही| ये करके वो बचकर कैसे निकल गए? इतने परिष्कृत सुरक्षा इंतज़ाम के बावजूद?"

“धुआँ और भगदड़,” मुख्य जासूस ने सुझाया| “किसी ने उन्हें जाते नहीं देखा| कम-से-कम अभी तक कोई रिपोर्ट तो नहीं आई है| ये बेहद प्लेंड (नियोजित) था| और अंजाम भी बेदाग दिया गया|”

“सुराग बस इतना ही है अभी तक, कि नूर के ग्लास चैंबर के पास पानी मिला| हमें नहीं मालूम वो वहाँ कैसे आया| क्या नूर की हिफाज़त की कोई और प्राइवेट व्यवस्थाएँ है, जिनके बारे में हम नहीं जानते?”

ज़ुबिन ने जासूस को कड़ी नज़र से घूरा, लेकिन नकारात्मक सिर हिला दिया|

“तो मामला अन्दर का है,” मुख्य जासूस ने कंधे उचका दिया| “वैसे, मौका-ए-वारदात पर हमें ये वॉकी-टॉकी मिला|”

“ये तो हमारा है,” जुबिन बिखर-सा गया| “क्रैप! तो क्या समझें इससे हम? मेरा सुरक्षा प्रमुख कहाँ है? मैंने उसे अभी तक क्यों नहीं देखा?”

“देखता हूँ अगर आपके लिए उसे खोज पाता हूँ मैं,” मुख्य जासूस नम्रता से कह कर वहां से चल दिया|

जुबिन से दूर जाते हुए उसने चैन की सांस ली| वो अपने काम में जुटना चाहता था| रात लम्बी होनी तय थी, और घटनाओं के सीधे बाद असैनिकों को ब्योरे देने और उन्हें आश्वस्त करने से नफरत थी उसे| लेकिन किसी को तो ये करना ही पड़ता|

उसने फिर कंधे उचकाये और अपने सेल फोन पर एक पूर्व-निर्धारित नंबर मिलाया| दूसरी ओर से कॉल का जवाब मिलने पर माउथपीस में उसने कहा, “मैं हूँ| नूर गया!”

कुछ देर उसने फोन पर बात की, फिर कॉल काट दी|

(नोटः दिलचस्प है कि इस कहानी के मूल अंग्रेज़ी प्रकाशन के बाद, नवंबर 2015 में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हीरा मिला, जिसका नाम 'लेसेदी ला रोना’ रखा गया, जिसका बोत्सवाना की राष्ट्रीय भाषा सेत्स्वाना में अर्थ है 'हमारा प्रकाश’| बोत्सवाना वह दक्षिणी अफ्रीकी राष्ट्र है जहां 1,111 कैरेट का ये पत्थर पाया गया था| पिछले 100 सालों में मिले हीरों में से सबसे बड़े, इस हीरे की खोज ने इसकी मालिक कंपनी - कनाडा की ल्यूकरा (एलयूसीआरएफ) – के शेयरों को पर लगा दिए)

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