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Fathead Minnow (Pimephales promelas)चीनी दार्शनिक झुआन्गज़ी जानता था कि मछली की ख़ुशी (Machhli Ki Khushi) किसमें है, लेकिन हुईज़ी ने ले लिया पंगा|

 

जोश के गोल जवाब सुनकर रोष को याद हो आया उनका किस्सा|

पिछली कहानी: पढ़ें इस किस्से से पहले की कथा: भेड़िया और मेमना | Bhediya Aur Memna (अभी अप्रकाशित)

“जिग्नेश ने कल मुझे अपने घर बुलाया है,” जोश बहुत उत्साहित था| “स्कूल से ही उसकी माँ मुझे अपने साथ ले जाएगी|”

“घर कहाँ है उसका?” रोष ने पूछा|

“सैम के घर के सामने,” जोश ने जवाब दिया|

“सैम का घर कहाँ है?" रोष ने पूछा|

"जिग्नेश के घर के सामने,” जोश बोला|

"और उन दोनों का घर कहाँ है?” रोष ने फिर पूछा|

"आमने सामने," मासूम जवाब मिला|

“अच्छा झुआन्गज़ी," रोष ने हार मान ली| “मैं तेरी माँ से पूछ लूँगा|”

"ज़ुआंग झोउ?" जोश रुका, और बाप की बात पर ध्यान देने लगा|

"च्वांग्त्से," रोष ने हामी भर कर आगे कहा, “महान चीनी विचारक और ज़ेन बौद्ध दार्शनिक जो दो हज़ार साल पहले हुआ करता था| एक मशहूर एशियाई कहानी है झुआन्गज़ी के बारे में|"

"वो और हुईज़ी एक बार हाओ झरने के बांध के किनारे-किनारे चले जा रहे थे| सुंदर धूप खिली हुई थी| नदी के मीठे पानी में रहने वाली नन्ही मछलियाँ बांध के साफ पानी में इधर-उधर उछल कूद मचा रही थीं|”

“ये छोटी मछलियाँ,” झुआन्गज़ी ने टिप्पणी की, "पानी से बाहर उछलतीं और मनचाही दिशा में दौड़ी जातीं| सही में मौज ले रही हैं|”

"आप तो मछली नहीं हो," हुईज़ी ने बात पकड़ ली| “आपको कैसे पता कि मछली को क्या पसंद है?"

“आप तो मैं नहीं हो,” झुआन्गज़ी ने कहा| "आपको कैसे पता कि मुझे नहीं पता, कि मछली को क्या पसंद है?”

“मैं आप नहीं हूँ,” हुईज़ी ने बहस की, “तो मुझे यकीनन नहीं पता कि आपको क्या पता है| लेकिन आप मछली नहीं हो| तो आपको निश्चित रूप से नहीं पता कि मछली को क्या पसंद है!"

"क्या आपने अभी-अभी मुझसे पूछा नहीं,” झुआन्गज़ी ने पूछा, "कि मुझे कैसे पता कि मछली को क्या पसंद है?”

"हाँ," हुईज़ी के जवाब दिया|

"तो आपको पता था कि मुझे पता है, जब आपने सवाल पूछा," झुआन्गज़ी ने कहा, और आगे बढ़ गया|

"मैं कुछ समझा नहीं, पा," नन्हा जोश उलझ गया था|

“मैं भी कुछ समझा नहीं था,” रोष ने कहा, "जब तूने मुझे बताया कि तेरा दोस्त कहाँ रहता है| लेकिन मुझे पता चल गया था, कि तुझे पता है|”

“तो क्या वो वाकई जानता था कि मछलियों को ख़ुशी किस चीज़ में मिलती है?” जोश ने फिर पूछा| वो अभी भी उलझन में था|

"वो वाकई जानता था," रोष ने हामी भरते हुए कहा, "कि मछलियों को क्या पसंद है|"

फिर वह भी उठ खड़ा हुआ, और आगे बढ़ गया|

अगली कहानी: पढ़ें इस किस्से से आगे की कथा: अंडे कैसे बनते हैं ?| Ande Kaise Bante Hain (अभी अप्रकाशित)