प्रयोक्ता रेटिंग: 4 /5

सक्रिय तारकसक्रिय तारकसक्रिय तारकसक्रिय तारकनिष्क्रिय तारांकित
 


Untitled

जोखिम प्रबंधन (Jokhim Prabandhan) के लिए रिस्क मैनेज करो| कैसे?

 

परिहार्य अनावरण रोको, क्योंकि बिज़नेस हो या जीवन, रिस्क कम तो किया जा सकता है, पर पूरी तरह खत्म नहीं|

 

रिस्क मैनेजमेंट सिखाती रोष की मज़ेदार कहानी

पिछली कहानी: मार्केटिंग बनी आसान

सी.के. और सनी बड़े चाव से, रोष को मज़ेदार जीवंत उदाहरणों से मार्केटिंग की शब्दावली समझाता, सुन रहे थे|

जैसा कि उसने वादा किया था, पाँच मिनट खत्म होने से पहले ही उसने पाठ समाप्त कर दिया|

पत्थर की ठंडी पटिया, जिसपर वह अब तक बैठा हुआ था, से वह उठ खड़ा हुआ और उनकी ओर देखकर मुस्कराया| उसे मालूम था कि उसने अपनी डाक बाँट दी थी, और अच्छे से बाँटी थी|

एक पैमाना अब तय हो गया था| उन्हें भी अपना स्तर वहां तक उठाना होगा, अगर वे उसकी अन्तर्दृष्टि और परिश्रम से आगे भी फायदा उठाते रहना चाहते थे|

अभी तक वे अपना पेट पकड़ कर बेकाबू हंसी से लोटपोट हो रहे थे|

“ज़बरदस्त हो आप,” सनी ने ठहाके लगते हुए कहा, “लेकिन सोने पे सुहागा ये, कि मज़ाकिया भी हो|”

“शुक्रिया,” रोष ने सरलता से कहा| “अगले पाठ में भी साथ आना हो, तो स्वागत है तुम्हारा| आना है?”

दोनों ने फ़ौरन गर्मजोशी से सिर हिलाकर हामी भरी| अगले दिन का वक़्त और जगह फटाफट तय की गई| दूसरा पाठ रोष तैयार करके कराएगा, ये तय हुआ| विषय था, जोखिम प्रबंधन|

सी.के. का पहला सबक उसके दो दिन होना तय हुआ| सनी दोबारा आना चाहे, तो उसका दोनों सत्रों में स्वागत था|

अगले दिन कॉलेज सभागार (ऑडिटोरियम) में वे दोबारा मिले| रोष ने फिर सरल शब्दों में अवधारणाओं (concepts) से उनका परिचय कराया, और रोज़मर्रा के दिलचस्प उदाहरण दिए| वक़्त उड़ चला| सीखने की गति तेज़ी पकड़ने लगी|

“लेकिन हैज़र्ड (hazard) और रिस्क (जोखिम) में अंतर क्या है?” सनी पूछ रहा था|

“हैजर्ड वो कोई भी चीज़ हो सकती है, जिससे नुकसान पहुँच सकता हो,” रोष ने समझाया| “ये हानि का संभावित स्रोत है। जैसे दीवार से बल खड़ी सीढ़ी, मेज़ पर पड़ी हथौड़ी, सड़क पर कार, तुम्हारे बगल से उड़ती मक्खी| ये सब खतरों के उदाहरण हैं| हैजार्ड हमारे जीवन में चारों ओर मौजूद हैं।"

“रिस्क किसी हज़र्ड से होने वाले असली नुकसान की सम्भावना है| प्रायिकता (probability) किसी घटना के होने की संभावना का एक संख्यात्मक माप है, और हम इसकी गणना कर सकते हैं। तो, रिस्क किसी विशिष्ट खतरे से होने वाली हानि की संभावना की मात्रा है|”

“किसी घटना के घटने के बारे में हम कितने विश्वास से कुछ कह सकते हैं? ये निश्चितता 0 से 100% के बीच किसी प्रतिशत, या 0 से 1 के बीच किसी संख्या से वर्णित की जा सकती है, जहाँ 0 का मतलब असंभव और 1 का मतलब घटना घटने की पूरी संभावना होता है। ये संख्या घटना घटित होने की प्रोबेबिलिटी है|"

"घटना की प्रायिकता जितनी बड़ी, उतनी बड़ी हमारी मानना, कि घटना घटेगी| कल सूर्योदय होगा, इसकी प्रायिकता लगभग 1 है, क्योंकि अभी बहुत वर्षों तक सूर्य का होना पक्का है। सी.के. बच्चा जनेगा, इसकी संभावना लगभग 0 है, क्योंकि सी.के. औरत नहीं है।"

"लगभग?" सनी पूछ बैठा। "ये संभावना 0 क्यों नहीं? क्या आदमी को गर्भ ठहरना असंभव नहीं, या सी.के. के बारे में आप कुछ ऐसा जानते हो जो मैं नहीं जानता?”

"मैं चौकस हूँ," रोष हंसा| “जिस तरह विज्ञान तरक्की कर रहा है, कुछ भी असंभव नहीं लगता।"

"लेकिन विषय पर ही रहें, तो प्रायिकता किसी निष्पक्ष सिक्के के टॉस से सरलता से समझी जा सकती है| चूँकि खरा सिक्का उछालने पर केवल दो संभावित परिणाम हो सकते हैं, हेड या टेल, तो वे दोनों समान रूप से संभावित हैं, और हेड आने की प्रायिकता टेल आने की प्रायिकता के बराबर है| दोनों संभावनाएँ 1/2 या 50% हैं।"

“रिस्क (जोखिम) तब पैदा होता है, जब ये संभव हो कि किसी खतरे (हैज़र्ड) से असल में हानि हो सकती है| जोखिम का स्तर कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे कि कोई व्यक्ति या वस्तु खतरे के नज़दीक कितनी बार आते हैं, और ये परिस्थिति के अनुसार बदल भी सकता है|”

“उदाहरण के लिए, एक बस ड्राइवर की सड़क दुर्घटना होने की संभावना, एक सेवानिवृत्त व्यक्ति, जिसके पास कार नहीं है, की सड़क दुर्घटना होने की संभावना से ज़्यादा है। एक खड़ी गाड़ी का किसी को ठोक देने का खतरा बहुत कम है, जबकि किसी का एक खड़ी गाड़ी को ठोक देने का खतरा अधिक है|”

"जोखिम कम ज़्यादा इन बातों से भी हो सकता है कि गाड़ी कहाँ खड़ी है, कैसे खड़ी है, किसकी है और कितनी महंगी है, इत्यादि|"

सी.के. और सनी मंत्रमुग्ध वहाँ बैठे, उसे सुन रहे थे| चीज़ों को कितना सरल बना देता था वह| उसका स्पष्ट बोध अवधारणाओं को समझना कितना आसान कर देता था| उसके उदाहरण सिद्धांत को व्यावहारिकता से लागू करते थे|

उसका पांडित्य, उससे और सीखने को प्रेरित करता था| जब वह बोल रहा होता, तो समय को पंख लग जाते, और पलक झपकते वह अपने व्याख्यान का समापन करता दिखाई पड़ता|

"तो, जोखिम का उन्मूलन नहीं किया जा सकता,” रोष बात खत्म कर रहा था| “उसे केवल कम किया जा सकता है। और यही कारण है कि जोखिम प्रबंधित किया जाना चाहिए।"

"रिस्क को कम करने के लिए बहुत कुछ किया जा सकता है| उसे कम करने के लिए सभी संभव रणनीतियों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उसे मापा जाना चाहिए, सूचित किया जाना चाहिए| उसका परिहार्य अनावरण रोका जाना चाहिए।"

"एक आदमी, अपनी बीवी के शॉवर से बाहर निकलते ही, शावर में नहाने के लिए घुस रहा था, जब उनके दरवाज़े की घंटी बजी। दरवाज़ा खोलने कौन जाएगा, इस बात पर एक विद्युतीय बहस के बाद, पत्नी ने हथियार दाल दिए, जल्दी से खुद को बड़े तौलिये में लपेटा और बाथरूम से बाहर भागी|”

उसने बाहर का दरवाज़ा खोला| दरवाज़े पर चतुर खड़ा था, उसका पड़ोसी|

इससे पहले कि वह कुछ कह पाती, चतुर बड़बड़ाया, “हज़ार डॉलर दूँगा, अगर दम भर के लिए ये तौलिया गिरा दो|”

तेज़ी से फैसला कर, औरत ने तौलिया बदन से नीचे ढलक जाने दिया और चतुर के सामने नग्न खड़ी रह गयी|

कुछ पल उसे हसरत भरी आँखों से निहारने के बाद, चतुर ने चुपचाप बटुआ निकाला, $1000 निकाल कर उसके हाथ पर धरे और वापिस लौट गया|

अभी जो कुछ अचानक घट गया था - उसमें उलझी, उत्साहित औरत ने - अपना तौलिया उठाया, झटपट उसे खुद पर लपेटा, दरवाज़ा बंद किया, और पैसा अपने पर्स में रखने, यंत्रवत बेडरूम की ओर चल दी|

शावर से पति ने उसे पुकार कर पूछा, "कौन था?"

"चतुर था, अपना पड़ोसी," उसने जवाब दिया|

“बढ़िया!" पति ने कहा। "तुम्हें वो $1000 दे गया, जो उसने मुझे चुकाने थे?”

सी.के. और सनी हतप्रभ, रोष को घूर रहे थे|

"उसे दरवाज़ा खोलने खुद जाना चाहिए था," रोष ने कहना जारी रखा| “खुद जाने से पत्नी को भेजना, ज़्यादा जोखिम भरा था| क्यों? क्योंकि अधनंगी औरत का, बाहर का दरवाज़ा खोलने जाना, खतरनाक है|”

“औरत तो वैसे ही प्रलोभन है!” सनी फुसफुसाया| “अधनंगी हो, या नहीं ..."

"तो, रिस्क मैनेज करो,” रोष ने उसे आँख मारते हुए, लेक्चर खत्म किया| “परिहार्य अनावरण से बचो|"

"और कैसे-कैसे कर सकते हो जोखिम प्रबंधन? लोगों को रिस्क के बारे में बताओ| कर्मचारियों, ग्राहकों, आपूर्तिकर्ताओं और शेयरहोल्डरों जैसे हितधारकों के साथ, समय रहते, प्रासंगिक, गंभीर, क्रेडिट या रिस्क सम्बंधित जानकारी बाँटो।"

अगली कहानी: खबर रखो