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Thich Nhat Hanh Marche meditative 45

बालकथा: गुस्सैल बुद्ध (Gussel Buddh)

 

वियतनामी ज़ेन मास्टर थिच नहत हन कहते हैं कि गुस्सा सचेतनता से काबू आता है कोरी लफ्फाज़ी से नहीं।

 

थिच न्हात हान की बौद्ध कहानी

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“जब पा को मुझ पर गुस्सा आता है, तो वो मुझे डांटते हैं,” नन्हे होश की आँखों में बड़े-बड़े आँसू थे| “लेकिन जब मुझको उन पर गुस्सा आता है, तो उन्हें कोई नहीं डांटता|”

“गुस्सा खुद ही एक सज़ा है,” ईशा उसे चुपचाप गले लगाते हुए फुसफुसाई| “हमारा क्रोध खुद हमें ही भरपूर दण्डित कर देता है|”

“ये बिल्कुल ठीक नहीं है,” होश को यकीन नहीं हुआ|

“तुझे लगता है कि वो तुझे डपट के खुश होते हैं?” ईशा ने पूछा उससे| “वो खुद भी तड़पते हैं| और कई बार तो तू भी इतना परेशान करता है, कि अमिताभ बुद्ध भी भड़क उठें|”

“अमिताभ बुद्ध कौन हैं?” होश ने पूछा|

“अमिताभ संस्कृत के दो शब्दों अमित और आभा से बनता है, इसलिए उसका मतलब हुआ अनंत रौशनी| उन्हें अमिता बुद्ध, अमितायुस (इस संस्कृत शब्द का अर्थ भी अनंत जीवन है), अमिदा (जापानी में) या एमितुओ फो (चीनी में) भी कह कर बुलाया जाता है|”

“कई एशियाई देशों में बुद्ध अमिताभ शायद सबसे प्रसिद्ध बुद्ध हैं| उन्हें मसीहा माना जाता है, और उन पाँच ‘स्वयं भू’ बुद्धों (ध्यानी बुद्धों) में से एक, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे हमेशा से रहे हैं|”

"महायान बौद्ध धर्म के अनुसार, वे ऐतिहासिक गौतम बुद्ध (पाली में गोतम), और बोधिसत्व (जो बुद्ध बनने की राह पर हैं) अवलोकितेश्वर के रूप में प्रकट हुए थे|”

“अपनी किताब 'बीइंग पीस' (यानी, शांतिमय बनना) में, थेय एक ऐसी औरत की कहानी कहते हैं, जो अपने अन्दर का बुद्ध जगाने और शांति पाने के लिए, रोज़ाना 10 मिनट बुद्ध अमिताभ के नाम का जाप किया करती थी|”

“हम सभी में जागृत होने की क्षमता बुद्धों जितनी ही है, और कुछ लोग अपने भीतर के बुद्ध तक पहुँचने के लिए जाप करते हैं|”

“वे ऐसा मानते हैं कि जाप करते हुए जब कोई नाम की ध्वनि से भर जाता है, तो चिंता और व्याकुलता धीरे-धीरे गायब हो जाती है, और शांति और आनंद का एहसास होता है| हालाँकि, थेय चैतन्य को रास्ता बताते हैं|”

“थै कौन हैं?" होश ने पूछा|

थिच न्हात हान, एक प्रसिद्ध वियतनामी ज़ेन मास्टर, जिन्हें प्यार से थेय बुलाया जाता है| वियतनामी में, थेय का अर्थ शिक्षक या गुरु भी होता है| 70 साल से ज़्यादा उम्र है उनकी, पर इस समय इस ग्रह पर रहने वाले शायद वे दूसरे सबसे प्रभावशाली बौद्ध भिक्षु हैं|”

“पहले कौन हैं?” होश ने पूछा|

"दलाई लामा," ईशा ने जवाब दिया।

होश ने नाम पहचान कर सिर हिलाया| दलाई लामा के बारे में उसने अपने पिता से सुन रखा था|

“जिस साल तेरे पिता पैदा हुए थे,” ईशा ने आगे कहा, “उस साल मार्टिन लूथर किंग, जूनियर, ने थेय को नोबल पुरस्कार के लिए मनोनीत किया गया था| वे कई किताबें लिख चुके हैं, जिनमें खूब बिकने वाली द मिरेकल ऑफ माइंडफुलनेस’ (यानि, चेतना का चमत्कार) भी शामिल है|"

मिस नुयेन, थेय लिखते हैं, ने अपना दैनिक अभ्यास शुरू करने के लिए धूप जलाई, एक छोटी सी घंटी बजाई, और फिर 10 मिनट तक के लिए ‘नमो अमिताभ बुद्ध’ जपना शुरू किया|”

“हालाँकि इस अभ्यास को वह पिछले 10 से ज़्यादा सालों से करती आ रही थी, फिर भी वह तंगदिल थी, और हर समय लोगों पर चिल्लाती रहती थी|"

“एक दोस्त ने उसे सबक सिखाने की ठानी| इसलिए एक दिन, जैसे ही उसने अपना जाप शुरू किया, उसने उसके दरवाज़े पर आकर पुकारा: मिस नुयेन|”

“चूँकि ये उसके जाप का समय था, और वो नहीं चाहती थी कि उसमें खलल पड़े, उसने उसे नजर अंदाज कर दिया और जपती रही: नमो अमिताभ बुद्ध, नमो अमिताभ बुद्ध|”

“लेकिन ये मेहमान तो टला ही नहीं| उसने भी उसके दरवाज़े से फिर गुहार लगाई: मिस नुयेन। मिस नुयें!"

"थोड़ा नाराज होकर, उसने आवाज ऊँची की, ताकि वह साफ-साफ सुन ले: नमो अमिताभ बुद्ध, नमो अमिताभ बुद्ध|”

"पर उसकी हताशा बढ़ चली, जब मेहमान ने भी आवाज ऊँची कर ली, ताकि वह साफ-साफ सुन सके: मिस नुयेन। मिस नुएँ!"

‘ये शांति और प्रार्थना का बखत है, गुस्से का नहीं,’ उसने खुद से कहा| ‘इंतज़ार करने दो उसे, जब तक मेरा खत्म नहीं होता|’

“नमो अमिताभ बुद्ध,” उसने जारी रखा|

प्रतीक्षा करने के मूड में आगंतुक भी नहीं था| उसने भी हाँक लगाई: मिस नुएं!"

मिस नुयेन क्रोध से उबलने लगी, लेकिन वर्षों का अनुष्ठान अभ्यास उसपर अंकुश धरे रहा|

“नमो अमिताभ बुद्ध, नमो अमिताभ बुद्ध...” वह तेज़ी से जपने लगी, ताकि 10 मिनट फटाफट कट जाएँ|

"मिस न्यूएन, मिस नुयेन ..." बाहर से भी मंत्रोच्चार तेज़ी से होने लगा|

जैसे-जैसे यह होता गया, वह और कुण्ठित होती गई। वो जूझी इससे, पर बार-बार मन में आने लगा कि जाप रोक के वो जाए, और जाकर उसकी पूरी खबर ले ले|

“नमो अमिताभ बुद्ध, नमो अमिताभ बुद्ध...” बाहर से आती चीखों को अपनी आवाज़ के शोर में डुबो डालने के लिए वह चिल्लाई|

"मिस न्यूएन, मिस न्यूएन ..." आदमी बाहर से वापिस चिल्लाया।

फिर अचानक, उसके सब्र का बांध टूट गया| वह और सह न सकी| उछल कर खड़ी हुई, कपाट धड़ाक से खोला, बाहर वाले गेट तक दौड़ती गई, और जाकर उसपर बरस पड़ी, “क्यों कर रहे हो ऐसा? मैं अपना पाठ कर रही हूँ, और तुम बार-बार मेरा नाम पुकारे जा रहे हो!”

दोस्त उसे देखकर मुस्कुराया, और बोला, “मैंने तो तुम्हारा नाम सिर्फ 10 मिनट ही पुकारा, और तुम इतना गुस्सा खा गईं| तुम अमिताभ बुद्ध का नाम पिछले 10 बरसों से पुकारे जा रही हो| सोचो ज़रा, वो कैसे अँगारों पे लोट रहे होंगे!”

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