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Akshardham (Photoshop Enhanced)किरदार बनाओ और ज़ुबान पर काबू रखो (Zubaan Par Kabu Rakho), तो ऋषि दुर्वासा की तरह, तुम्हारे शब्द भी तलवार से अधिक धारदार हो जायेंगे| वे दुनिया को हिला सकेंगे, इतिहास बना सकेंगे|

 

दुर्वासा ऋषि के श्राप की बोधप्रद हिन्दू पौराणिक कथा, रोष की ज़ुबानी

पिछली कहानी: महानता की झलक

घर की चुप्पी तब अचानक भंग हो गयी जब लड़के चिल्लाते और एक दूसरे का पीछा करते रोष के कमरे में घुस आये|

जोश ने अपने पिता की गोद में घुस कर होश को चिढ़ाती नज़रों से देखा, ये जानते हुए कि यहाँ उसके साथ कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं होने वाली| रोष ने मुस्करा कर दोनों को गले से लगा लिया|

“आपने पहले कहा कि कई हिन्दू अवतार हो चुके हैं,” ईशा ने अपनी बातचीत की तरफ उसका ध्यान वापिस खींचा| “आप मुझे दूसरों के बारे में और बताओ|”

“आप किसकी बात कर रहे हो?” अचानक कोई कहानी महसूस करते हुए, जोश ने पूछा|

सनातन हिन्दू अवतारों की,” ईशा ने कहा| “मसलन, मैं जानना चाहती हूँ कि कोई समुद्री कछुआ ऐसे कौन से महान काम कर सकता है कि प्राचीन सनातनी उसे विष्णु का अवतार कह बैठे?”

“ये सवाल दिलचस्प है,” रोष ने माना| “सत युग में मत्स्य, याने मछली या मीन के बाद, दशावतार समय सारणी में कछुए कूर्म को ही अगले अवतार के रूप में याद किया जाता है|”

आन्ध्र प्रदेश में कूर्म को समर्पित कम से कम दो मंदिर हैं| एक चित्तूर डिस्ट्रिक्ट में कुर्मई में, और दूसरा श्रीकाकुलम डिस्ट्रिक्ट में श्रीकुर्मम में| इस अवतार को समर्पित कम से कम एक और मंदिर कर्नाटक के चित्रदुर्ग ज़िले में गविरंगपुर में है|”

“सागर को मथने का संस्कृत शब्द है समुद्रमंथन| समुद्र मन्थन की इस प्रसिद्ध हिन्दू पौराणिक कथा के चित्र न सिर्फ भारत भर के मंदिरों में जगह-जगह मिलेंगे, बल्कि सदियों से ये कहानी और मुल्कों में भी जानी-मानी हिंदू पौराणिक कथाओं में से एक रही है|”

"उदाहरण के लिए, कंबोडिया (प्राचीन संस्कृत नाम: कंबुज या कंबोज) के सीएम रीप नामक प्रान्त के, अंगकोरवात (अंग्रेजी: अंकोरवाट) के अधिक लोकप्रिय मंदिरों में से एक, ता प्रोह्म में, ये कहानी पत्थर की नक्काशी से दिखाई गयी है| 1992 में यूनेस्को ने इसे विश्व विरासत सूची में जोड़ा था|”

“12वीं और 13वीं शताब्दी में दरअसल बायों शैली में ये मन्दिर महायान बौद्ध मठ और विश्वविद्यालय की तरह बनाया गया था, लेकिन जब खमेर साम्राज्य मध्य 13 वीं सदी में हिंदू धर्म में वापिस परिवर्तित हुआ, तो राजकीय मंदिर को उसी हिसाब से बदल दिया गया|"

"मैंने भी थाईलैंड के सुवर्णभूमि हवाई अड्डे पर समुद्र मन्थन की एक विशाल मूर्ति देखी है,” ईशा ने सहमति जताई| “लेकिन एक कछुआ संभवतः ऐसा क्या कर सकता है, कि मानव जाति उसे एक मसीहा ईश्वर की तरह पूजे?”

भागवतपुराण, महाभारत, और विष्णु पुराण में दूधिया सफ़ेद सागर, क्षीरसागर, के मथे जाने की चर्चा है,” रोष ने कहा, “जिसे विष्णु का पारम्परिक निवास माना जाता है| ताकि उसमें छिपी महत्वपूर्ण चीज़ें और संसाधन निकाले जा सकें|”

दैत्य राज बलि की असुर (संस्कृत: राक्षस, दैत्य, या दानव) सेनाओं से बुरी तरह ठुकाई होने के बाद, जिन्होंने अंततः सुरों (संस्कृत: देवताओं, देवों) को हराकर ब्रह्मांड पर नियंत्रण कर लिया था, सुरों को अपनी उम्र और समृद्धि बढ़ाने के लिए इन चीज़ों की बहुत ज़रूरत थी|”

“भगवानों को कैसे हराया जा सकता है?” जोश ने हैरत से पूछा| “क्या वो सबसे ताकतवर नहीं होते?”

“देवताओं को,” रोष ने उसे सही करते हुए कहा| “सबसे शक्तिशाली हाथी सबसे नन्हीं चींटी से मारा जा सकता है| कुछ हिन्दू, देवताओं की इस हार का कारण ऋषि दुर्वासा के श्राप को मानते हैं, जिन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है| कहते हैं कि उन्होंने देवराज इंद्र को ज़िल्लत उठाने का शाप दिया था|"

"देवता को कोई कैसे शाप दे सकता है?” जोश ने और अधिक अविश्वास से पूछा|

“लोग अपनी बदनसीबी के लिए ईश्वर को कोसते ही रहते हैं,” रोष मुस्कराया| “ये और बात है कि उनकी बद॒दुआओं में कोई असर नहीं होता| लेकिन ऋषि तो शुद्ध आत्माएँ थे। उनके लफ़्ज़ों में गज़ब की ताक़त थी| जिसकी वजह से शक्तिवान व्यक्ति और देवता, सभी काबू में रहा करते और दूसरों से ठीक से पेश आया करते|”

महाभारत के आदिपर्व की एक कथा, जिसपर कालिदास ने शायद 5 वीं शताब्दी ईस्वी के आसपास विश्वविख्यात संस्कृत नाटक अभिज्ञान शाकुन्तलम् लिख डाला था, में शकुन्तला अपने प्रेमी राजा दुष्यन्त के ख़याल में इस तरह खोयी थी, कि उसने घर आये मेहमान दुर्वासा की ठीक से आवभगत ही न की|"

"गुस्से में आकर ऋषि ने उसे शाप दे डाला कि जिसके ख्यालों में उलझी वो दुनिया भुलाये बैठी है, वही एक दिन उसे भूल जाएगा|"

"यह वही ऋषि दुर्वासा हैं, जिनके बारे में तुमने तब सुना होगा जब तुम कुछ साल पहले नॉएडा का अक्षरधाम मंदिर (फोटो ऊपर है) देखने गए थे| संत स्वामीनारायण के अनुयायियों का मानना है कि दुर्वासा ने नारायण को भी एक नश्वर की तरह पैदा होने शाप दिया था, जिसकी वजह से स्वामिनारायण को एक आम आदमी की तरह जन्म लेकर पृथ्वी पर आना पड़ा|”

"आधुनिक आज़मगढ़ में लोकमान्यता है कि दुर्वासा का आश्रम फूलपुर तहसील मुख्यालय से 6 किमी उत्तर में स्थित था, टोंस और मझुई नदियों के संगम पर, जहाँ उनके कई शिष्य उनसे पढ़ने जाया करते थे|”

“अपनी गर्म-मिज़ाजी के बावजूद, दुर्वासा एक विद्वान ऋषि थे| तो, वो जहाँ भी जाते, वहाँ उनका खूब आदर-सत्कार होता| बड़े होकर उनके जैसे अखंड चरित्रवान बनो, तो तुम्हारे शब्दों में भी उनके जैसी शक्ति आयेगी|”

“जानते हो, जीभ हमारे शरीर की सबसे मज़बूत मांसपेशी है| हालांकि वह खुद 1 किलो भार उठाने में सक्षम नहीं, लेकिन दूसरों को 100 किलो वज़न उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है|”

“दिन भर जो शब्द ये घड़ के बाहर भेजती है, उनमें बहुत ताकत होती है| शब्द घाव कर भी देते हैं, और भर भी देते हैं, चाहे हम कोई भी हों, कहीं भी हों|”

“हम सब में ये ताकत है कि अपनी बोली से हम दूसरों को हिला सकें| लेकिन वो ताकत इतनी नहीं, कि इससे हम पर्वतों को भी हिला सकें|”

“लेकिन किरदार बनाओ और ज़ुबान पर काबू रखो, तो ऋषि दुर्वासा की तरह, तुम्हारे शब्द भी तलवार से अधिक धारदार हो जायेंगे| वे दुनिया को हिला सकेंगे, इतिहास बना सकेंगे|”

“अगर आसपास के लोगों को बिना सोचे-समझे, फालतू में ही कोसते फिरोगे, जुबान पर काबू नहीं रखोगे, तो तुम्हारा गुस्सा तुम पर ही भारी पड़ जाएगा| जैसे भागवत पुराण की एक और कथा में, एक बार राजा अंबरीश पर बिगड़ पड़ने से, मामला खुद दुर्वासा पर भारी पड़ गया था|”

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