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Public Service Announcement...ज्ञानवर्धक व्यावहारिक कहानी: स्मार्ट ड्राइविंग टिप्स (Smart Driving Tips)

 

कार चलाना सीखना आसान है, लेकिन उम्दा ड्राइविंग में लगती है प्रैक्टिस और कार की देखभाल

पिछली कहानी: संभाल के ड्राइव करो

अपनी दूसरे दिन की ड्राइविंग प्रैक्टिस के बाद होश ज़्यादा आत्मविश्वास महसूस कर रहा था|

कल की तरह उसने चर्चा की, कि उसने क्या ठीक किया और वह क्या बेहतर कर सकता था|

“हालाँकि आज ब्रेक लगाना कुछ अलग-सा लगा,” उसने बात खत्म करते हुए कहा| “क्या ये इस वजह से था कि हम गाड़ी इतनी लादे फिर रहे थे?”

“हाँ,” रोष ने कहा| “तुझे लेने से पहले मुझे गाड़ी खाली कर देनी चाहिए थी, पर न वक़्त था, न ताकत|”

“गाड़ी में माल ढोने या गाड़ी से बाँध कर कुछ खींचने से, गाड़ी कैसे चलती है इसपर असर पड़ सकता है| ज़्यादा भार का मतलब गाड़ी को रुकने में देर लगेगी, तेज़ होने में देर लगेगी और कोनों पर बढ़िया से मुड़ेगी नहीं|”

“गाड़ी से कुछ बाँध कर खींचते (टोइंग) समय, सुरक्षित गति पर चलो, अगली गाड़ी से दूरी बढ़ाओ, और नियमित रूप से साइड में लगाकर रोको या साइड दो, ताकि दूसरे वाहन तुमसे आगे जा सकें|”

“अगली गाड़ी से 2 सेकंड की अनुसरण दूरी वाले नियम के बारे में मैं सोचता रहा हूँ, पा,” होश ने कहा| “कैसे पता लगेगा मुझे कि अगली गाड़ी तक पहुँचने में दो सेकंड लगेंगे मुझे? क्या मैं गिनूँ कि मुझे कितने सेकंड लगेंगे अगली गाड़ी तक पहुँचने में? जैसे अपने मन में गिनती एक, दो ...”

“कर सकते हो,” रोष ने कहा, “हालाँकि गति की कल्पना करने में कईयों को दिक्कत होती है| इससे आसान है ये देखना, कि किसी भी गति पर, अगली गाड़ी से पीछे इतनी सड़क हमेशा दिखाई देती रहे तुम्हें, जिसमें दोनों गाड़ियों के बीच एक काल्पनिक कार पार्क की जा सके|”

“ज़ाहिर है, सड़क पर दूसरे चालक भी तुम्हारे सामने ऐसी आकर्षक खुली जगह देखेंगे, तो आकर उसमें घुसने की कोशिश करेंगे| धीरज रखो और करने दो उन्हें ऐसा| अगर तुम्हारी ‘एल’ प्लेट्स देखकर भी वो तुमसे दूर नहीं रह पा रहे, तो किसी और बात से भी नहीं रुकेंगे|”

“टेस्ट के दौरान गुंजाइश बिलकुल कम है कि तुमसे किसी को ओवरटेक करने के लिए कहा जाए| तो ओवरटेक करने की ज़रूरत नहीं है, तो मत करो| ओवरटेक करना नौसिखिये के लिए खतरनाक है, और तेज़ स्पीड, खराब उजाले, ज़्यादा ट्रैफिक या ज़्यादा जोखिम वाले इलाकों में और भी रिस्की|”

“धीमे करने या रुकने के लिए तैयार रहो| लेकिन अगर ओवरटेक करने की ज़रूरत पड़ ही जाए, तो शीशों और अंध बिंदुओं (ब्लाइंड स्पॉट्स) को दो बार चेक करो, अपने दोनों ओर से गुज़रते ट्रैफिक के लिए| ओवरटेक तभी करो, अगर ऐसा करते हुए पूरी तरह सुरक्षित और विश्वस्त महसूस कर रहे हो|”

“जान-पहचान आत्मविश्वास को जन्म देती है| शुरुआत में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए एक ही गाड़ी का इस्तेमाल करो, बार-बार उन्हीं सड़कों पर चलाओ| मेरा बस चले तो, अपने टेस्ट में भी वही गाड़ी लेकर जाऊं जिसमें प्रैक्टिस की है| और टेस्ट रूट की सड़कें अगर पहले से पता हैं, तो उन्हीं पर चलाने की प्रैक्टिस भी करूँ|”

“दूसरों की कारें इस्तेमाल करनी पड़ें, तो याद रहे कि वे एकसेलेरेट, ब्रेक और हैंडल उस तरह नहीं होंगीं जिस तरह तुम्हारी अपनी कार होती आई है|”

“इसलिए अगर अपरिचित कार इस्तेमाल कर रहे हो, तो ज़रा फुर्सत निकाल कर जान लो पहले कि उसके कण्ट्रोल हैं कहाँ (लाइट, इंडिकेटर, वाइपर, डेमिस्टर) और जब तक तसल्ली न हो, अगली गाड़ी से दूरी कुछ और बनाये रखो|”

“कार चलाना सीखना आसान है, लेकिन उम्दा ड्राइविंग में प्रैक्टिस लगती है| अगले कुछ दिनों में कई स्मार्ट ड्राइविंग टिप्स दूँगा मैं तुम्हें, और सिखाऊंगा कार का बुनियादी रख-रखाव|”

"लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात, जो सड़क पर तुम्हें और तुम्हारे आस-पास दूसरों को महफूज़ रखेगी, और जिसके बारे में तुम कुछ कर सकते हो, वो है तुम्हारी अपनी कार की हालत|”

“न्यूज़ीलैंड की कारों के नियमित रूप से वारंट ऑफ़ फिटनेस (स्वास्थ्य जाँच) टेस्ट कराना कानूनन ज़रूरी है, लेकिन कई दूसरी छोटी-छोटी चीज़ें हैं जो अपनी कार की देखभाल करने के लिए तुम खुद कर सकते हो| चीज़ें जिन्हें करने में पैसा कोई खर्च नहीं होता, लेकिन जो तुम्हारी जान बचा सकती हैं|”

“जैसे टायरों की नियमित रूप से जांच करना| अगर तुम्हारे टायर ट्रेड (टायरों पर उठे हुए रबड़ के हिस्से) घिस गए हैं, या टायरों में हवा कम है, तो रुकने में तुम्हें देर लगेगी, और अगर सड़क पर पानी हो, तो तुम्हारी ग्रिप (टायर की सड़क पर पकड़) कम हो जायेगी|”

“ऐसे ही, टायर का प्रेशर सही रखने में खर्च कुछ नहीं होता, लेकिन उससे बचत बहुत होती है| जांच लो कि सारी लाइटें चलती हैं और विंडस्क्रीन (सामने का शीशा) वाइपर धब्बे नहीं छोड़ रहे| सुरक्षित ड्राइवर अपनी गाड़ी का ध्यान रखते हैं, और अपना ध्यान रखते हैं| ये है राज़|”

“अपना ध्यान रखते हैं?” होश ने पूछा| “वो कैसे?”

“हमारी शारीरिक और मानसिक स्थिति – दोनों का प्रभाव हमारी ड्राइविंग पर पड़ता है,” रोष ने कहा| “हम बीमार या थके हुए हों, तो प्रतिक्रिया (रिएक्शन) देर से कर पाते हैं| इसी तरह, नींद की कमी, तनाव, दवा और दारू भी फोकस (ध्यान) और एकाग्रता को कम कर देते हैं|”

“अपने प्रति सचेत रहो| अगर चलाने की स्थिति में नहीं हो, 100% ठीक महसूस नहीं कर रहे, तो हो सके तो ड्राइविंग करने से बचो| कार चलानी ही पड़े, तो अगली गाड़ी से दूरी बढ़ाए रखो ताकि ज़रूरत पड़ने पर प्रतिक्रिया करने का समय अधिक मिल सके|”

“लम्बी ड्राइव पर जाने से पहले की रात भरी-पूरी नींद लेने की कोशिश करो| कोई दवा ले रहे हो तो उसके दुष्प्रभाव (साइड-इफ़ेक्ट) चेक कर लो| कोई नयी दवा शुरू कर रहे हो, तो ज़्यादा सावधानी बरतो| ज़रूरत हो, तो डॉक्टर से पूछ लो, कि क्या इस दवा से मेरी ड्राइविंग पर कोई असर पड़ सकता है|”

“दारू पीके मत चलाओ – नो ड्रिंक एंड ड्राइव| अगर कोई दवा ले रहे हो, तो दारु पीने के बारे में ख़ास ख़याल रखो, क्योंकि शराब दवा की तासीर बदल सकती है| पीनी ही पड़े, तो टैक्सी लेकर घर चले आओ, या किसी न पिए हुए से कहो कि तुम्हें घर वापिस छोड़ जाए|”

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