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Super Paper Marioदिलचस्प कहानी: हाइकू एरर मेसेज (Haiku Error Message)

 

लैपटॉप फ्रीज़ हो जाने पर चिंतित ईशा को, रोष सुनाता है ‘सैलॉन प्रतियोगिता’ से मज़ेदार जापानी ज़ेन कविताएँ

पिछली कहानी: हम काम किसलिए करते हैं?

"क्या है यह?" ईशा ने उत्साह से पूछा। "ब्रीफकेस कंप्यूटर?"

"लैपटॉप!" रोष ने जवाब दिया|

उसकी कंपनी ने फैसला किया था कि कंप्यूटर का ज्ञान रखने वाले सभी साक्षात्कारकर्ताओं (इंटरव्यूर्स) को घर ले जाने के लिए कार्यालय (काम) से एक-एक लैपटॉप दिया जाए, ताकि वे कंपनी के नये खरीदे साक्षात्कार प्रोग्राम (इंटरव्यूइंग सॉफ्टवेयर) का फील्ड में अगली परियोजना (प्रोजेक्ट) में इस्तेमाल होने से पहले उससे परिचित हो सकें|

रोष घर में बने अपने ऑफिस में बैठा इसी पर खेल रहा था|

“मेरी किशोरावस्था में ही आ गए थे ये, लेकिन इस कंपनी में काम करना शुरू करने तक, इनपर कभी काम नहीं किया था मैंने|”

"ओसबोर्न 1, 1981 में आया था, अपने आविष्कारक एडम ओसबोर्न के नाम पर| कीमत दो हज़ार डॉलर से कम, और डेढ़ हज़ार अमरीकन डॉलर के तो प्रोग्राम ही डले हुए थे उसमें|”

"दिलचस्प ये, कि उस 8 बिट सीपीयू मशीन का भार 10 किलो से ज़्यादा था| उसमें कोई बैटरी नहीं थी, दोहरी 5.25 इंच (13.3 सेमी) की एकल घनत्व (सिंगल डेंसिटी) फ्लॉपी डिस्क ड्राइव और एक छोटी सी 5 इंच की अन्दर बनी (इन-बिल्ट) सीआरटी स्क्रीन थी|"

"मुझे सिखाओ यह काम कैसे करता है," ईशा बोली|

“ज़रूर," रोष ने कहा, और साक्षात्कार सॉफ्टवेयर बंद कर दिया| लेकिन प्रोग्राम फ्रीज़ हो गया और उसने एक एरर मेसेज (त्रुटि संदेश) दिया| रोष ने किबोर्ड कमांड से उसे बंद करने की कोशिश की, पर हुआ कुछ नहीं|

“अब क्या करें हम?” ईशा डर गयी| उधार माँगा महंगा उपकरण खराब हो जाए उनसे, ऐसा तो वो बिलकुल भी नहीं चाहती थी|

“रोवो!” रोष ने आह भरी, और हताशा से मशीन को दूर धकेल दिया|

“ये सन्देश तो बहुत डरावना है,” ईशा ने उस गुप्त अवैयक्तिक चेतावनी को घूरते हुए कहा|

रोष ने उसकी आवाज़ में डर महसूस कर लिया| वह फिर से गर्भवती थी, और ऐसी किसी चीज़ से वह तनाव ग्रस्त हो जाए, ये वह बिलकुल नहीं चाहता था|

“हाँ,” ईशा की स्कर्ट पकड़कर अपनी ओर खींचते हुए, उसने सहमति जताई| “उन्हें कुछ और काव्यात्मक होना चाहिए| तब थोड़ी मदद मिलेगी| मसलन:”

तेरा वेबपेज खा गया मैं
माफ करना| रसीला था
और स्वाद था खट्टा|

“हाँ जी!” वो अचानक मुस्कुरा उठी| रोष की अविचल भाव-भंगिमा से आश्वस्त होकर उसकी टेंशन एकदम ख़त्म हो गयी थी| ”तो फिर क्यों नहीं लिखते वो उन्हें इस तरह?”

“असल में, वो काव्यात्मक एरर मेसेज असली है,” रोष ने कहा| “एमआईटी में एक सर्वर से चला, और 1996 में एक मेलिंग लिस्ट (डाक सूची) में पोस्ट किया गया|”

“वाकई?” वो अविश्वास से हँसी|

“मज़ेदार है, है न!” वह भी हँस पड़ा| “इस साल के शुरू में अमरीकी पत्रिका ‘सैलॉन’ ने एक प्रतियोगिता आयोजित की थी, जिसमें पाठकों को आमंत्रण था कि वो माइक्रोसॉफ्ट के बेकार एरर मेसेजस को हाइकू से बदलें| उसे 200 से ज़्यादा सबमिशन (प्रस्तुतियाँ) मिले|”

"है क्या हाइकू ?" ईशा ने पूछा|

"जापानी कविता," उसने उत्तर दिया| "औपचारिक हाइकू के तो सख्त निर्माण नियम हैं। हर कविता में केवल तीन लाइनें, और कुल 17 अक्षर हो सकते हैं| पांच अक्षर पहली लाइन में होने चाहिए, सात दूसरी में, और पांच तीसरी पंक्ति में|"

(नोट: इस कहानी में लिखी हाइकु हिंदी में अनूदित है, इसलिए इस हिंदी हाइकू में असली हाइकू लिखने के ये नियम इस्तेमाल होते आप देख नहीं पायेंगे| अक्षर गिनने और फिर हमें इस बाबत लिखने में समय खराब न करें| अनुवाद पढ़ें, और गंभीर नुकसान को विनोद से हल्का करने की हाइकू लेखकों की इन कोशिशों का मज़ा लें)

“ज़ेन मास्टर क्षणभंगुर प्राकृतिक क्षणों के बारे में कुछ कहने के लिए हाइकू कहते थे, चरम संक्षिप्तता का इस्तेमाल करके, जो कि ज़ेन दर्शन का सार है| कहावतों, लोकोक्तियों, दोहों, श्लोकों और पदों की तरह ही, इन कालातीत संदेशों के गर्भ में भी शक्तिशाली अंतर्दृष्टि है|”

“वो एमआईटी वाला विनोदी था,” ईशा ने कहा| “ऐसे मज़ाकिया सन्देश याद हैं कोई और?”

रोष ने हामी भरी| ईशा को कुछ दिलचस्प सुनाने की कोशिश में, धीरे-धीरे उसे कुछ और याद आ गए:”

गंभीर एरर
सभी शॉर्टकट गायब हो गए हैं।
स्क्रीन, मनस, दोनों खाली ... (इयन ह्यूस)

इतनी बड़ी फ़ाइल?
बड़ी उपयोगी रही होगी।
पर अब वो गयी। (डेविड जे. लिसज़ीउसकी)

पहले हिमपात, फिर ख़ामोशी|
यह हज़ार डॉलर की स्क्रीन मर रही है
कितनी खूबसूरती से। ( साइमन फर्थ)

सब कुछ गया;
तेरा शाहकार मिटा दिया गया है|
दबाऊं ट्रिगर (हां / नहीं)? (डेविड कार्लसन)

जिन खोजा तिन पाईयाँ
हानि और अभाव:
"मेरा उपन्यास" मिला नहीं भैये| (हावर्ड कोर्डर)

ढूँढे है तू जो वेबसाइट
वो मिल न रही भाया
पर और भतेरी हैं| (जोय रोथके)

धैर्य की डगर पे रहो।
तुम्हारे गुस्से का कोई मोल नहीं|
नेटवर्क डाउन है। ( डेविड एन्सेल)

क्रैश तुम्हारे
महंगे कंप्यूटर को बना देता है
एक आम पत्थर| (जेम्स लोपेज)

चुक गयी मेमोरी|
पूरा आसमां उठाना चाहते हैं हम,
पर कभी उठा न पायेंगे (फ्रांसिस हीनी)

गलत लॉगिन।
केवल सही स्पेलिंग जानने वाले
दाखिल होंगे इस सिस्टम में। (जेसन एक्स्ली)

धारा में रखा कदम तुमने,
पर पानी तो बढ़ चुका आगे।
यह पृष्ठ यहाँ नहीं है। (कैस व्हिटिंगटन)

एरर हो गए हैं|
हम बताएँगे नहीं कहाँ और क्यों
आलसी प्रोग्रामर। ( चार्ली गिब्स)

तीन चीज़ें होनी तय हैं:
मौत, टैक्स, और डेटा खोना|
बूझो आज हुआ क्या है। ( डेविड डिक्सन)

कोई एरर नहीं
जैसे निरर्थक जीवन
बिन संघर्ष, बिन आनंद ( ब्रायन एम पोर्टर)

Windows NT क्रैश हो गया।
मैं हूँ मौत की नीली स्क्रीन|
तेरी चीखें सुनने वाला कोई नहीं। ( पीटर रोथमैन)

कल तो चली थी।
आज नहीं चल रही।
Windows है ही ऐसी। ( मार्गरेट सिगैल)

प्रिंटर तैयार नहीं।
घातक एरर हो सकता है।
पेन है तेरे पास? ( पैट डेविस)

जो ताओ दिखता है
वो तब तक असली ताओ नहीं, जब तक
तू टोनर न बदल ले। (बिल तोर्कासो)

सर्वर की टालमटोल
ब्राउज़र के लिए थी ढीली।
टाइम ख़तम, पैसा हज़म। (रिक जेस्परसन)

मिट चुका वो दस्तावेज़,
जिसे खोज रहे हो तुम
अब दोबारा टाइप करना होगा| (जूडी बर्मिंघम)

प्रोग्राम बंद हो रहा है
बंद करो सब ताम-झाम
हसरतें तुम्हारी बेहिसाब हैं। (माइक हेग्लर)

ईशा खिलखिलाकर कर लोट-पोट हो रही थी| इनमें से कुछ तो वाकई खूबसूरत हाइकू थीं|

“तो क्या जापान में अपनी खुद की हाइकू से बदल लिए उन्होंने कंप्यूटर एरर मेसेज?” उसने पूछा|

“अभी नहीं,” रोष भी उसके साथ हँस रहा था| “ये तो बस थोड़ी मज़ेदार रचनात्मकता थी| इन चतुर और मौलिक त्रुटि सन्देशों में से अधिकांश तो जापानियों ने लिखे ही नहीं| पर क्या पता| अभी तो शुरुआत है...”

“अब इस लैपटोप का क्या करेंगे हम?” उसने फिर पूछा| उसकी चिंता लौट आई थी|

शैतानी से उसे आँख मारकर, रोष ने जवाब हाइकू में दिया| इस बार हाइकू सूज़ी वागनर की थी:

अन्दर अराजकता का राज है।
कर मनन, पश्चाताप, और रिबूट।
अनुशासन लौट आएगा।

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