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Be differentदौलत देगी सुराग (Daulat Degi Surag), रोष ने सोचा, कि दुनिया-भर में बढ़ता ऋण व करेंसी छपाई भविष्य को कहाँ ले जायेंगे?

 

म्यूजिकल चेयर के इस खेल में उसे क्या करना चाहिए?

पिछली कहानी: काल चिन्तन 2017

वह तो यह सीखता हुआ बड़ा हुआ था, कि किसी परिसंपत्ति का मूल्य उसकी कमाई की क्षमता का माप होता है|

लेकिन 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट (Global Financial Crisis, GFC) में नियम तो दरकिनार कर दिए गए थे| वैश्विक अर्थव्यवस्थाएँ दौलत के हाईवे (राजमार्ग) पर यातायात नियमों के बिना ही दौड़ी जा रहीं थीं|

पिछले साल 2016 में, दुनिया ने $430 खरब उधार लिए थे| इस साल दुनिया भर में निरपेक्ष ऋण का आँकड़ा इस संख्या को भी पार करने वाला था|

यानी पहले से ही $6,500 ग्रह के हर आदमी, औरत और बच्चे पर बकाया था, जिनमें से अधिकांश तो इतना भी कमा नहीं पाते थे कि वो किसी भी रकम का कर्ज़ा चुका सकें|

स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एस एंड पी) के अनुसार 2017 में कुल वैश्विक संप्रभु ऋण $70 खरब होने का अनुमान था, जिसमें से 60% की देनदारी अमरीका ($22 खरब) और जापान ($18 खरब) की होनी संभावित थी| इन के पीछे उधार लेने की लाइन में खड़े थे चीन, इटली और फ्रांस|

एस एंड पी के मुख्य संप्रभु विश्लेषक मोरित्ज़ क्रेमर का कैलंडर उदाहरण राष्ट्रों के उधार का तुलनात्मक पैमाने पर एक व्यावहारिक नज़रिया देता था|

यदि ऋण साल भर समान रूप से वितरित किया जाए, तो अमेरिकी ऋण पत्र “1 जनवरी दुपहर के खाने के समय तक स्विट्जरलैंड की 2017 की उधारी ज़रूरत कवर चुके होंगे, ब्राज़ील की 30 जनवरी तक, और इटली की 17 फरवरी तक, " क्रेमर ने बताया| “उसके बाद वे चीन की माँग पछाड़कर 28 फरवरी तक बाकी की तमाम दुनिया की माँग से भी आगे निकल जायेंगे|”

कैसा ऋण होगा यह? पहले से ज़्यादा जोखिम भरा, और दिन-पर-दिन और रिस्की होता जाता| उधार के इन 430 खरबों में से केवल 7% अब एएए (AAA) रेटिंग पर थे – इतनी कम AAA रेटिंग पहले कभी नहीं रही थी|

बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (अंतर्राष्ट्रीय निपटारों का बैंक), जो दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों का केंद्रीय बैंक था, के अनुसार, वैश्विक कर्ज़ - जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का अनुपात रेकॉर्ड ऊँचाई पर था| सन 2000 के बाद से सरकारों, घरों और निगमों पर कर्ज बढ़ता गया था ... दुनिया में हर जगह

सोच तो ये रही थी कि GFC के बाद, दुनिया युद्ध स्तर पर उधार चुकाने में लगेगी और उधार लेने की आदत से बाज़ आयेगी, लेकिन तब से अब तक अमरीका में ऋण 63% बढ़ गया था, और यूरोज़ोन, जापान, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में औसतन 50%| उभरते बाज़ारों में, चीन के नेतृत्व में, उधारी 85% और बढ़ गयी थी।

दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने, दुनिया को महामंदी से बचाने के नाम पर, फ़िएट करेंसी छाप-छाप कर उसे नोटों (liquidity) से भर दिया था| बहुजन हिताय के नाम पर हुई इस प्रक्रिया में, बचत करने वाले (सेवर्स) नकारात्मक (नेगेटिव) ब्याज दरों से दण्डित हुए थे|

अब, लगभग एक दशक बाद भी, ऋण के इस बढ़ते इस्तेमाल को गिरफ्तार करने की जल्दी दिखाता, कोई कहीं नहीं दिखता था| ऋण डिफ़ॉल्ट फिर होना तय था| अनुशासित सेवर, जो ये ऋण देते हैं, उन्हें एक और सबक मिलने को था।

या नहीं था? कर्ज़ के होने के लिए, कर्ज़ा देने वाला होना चाहिए, जो कि परंपरागत रूप से बचतकर्ता रहा है| लेकिन अब तो दुनिया ‘छापो और कर्जा दो’ की थी| हर साल बढ़ा दी जाने से, अधिकतम ऋण की सीमायें तो लगातार बढ़ती ही आयीं थीं|

इस नए बहादुर युग में, बचत करने की ज़रूरत किसी को नहीं थी| लगभग हर कोई उधार ले सकता था| और लगभग हरेक उसे लेकर चुकाने में नागा कर सकता था| बिना किसी सज़ा के|

अब तो, बाकियों की ज़मानत पर बार-बार छुड़ा लिए जाने की उम्मीद रखना भी चलन में था| बस आज मायने रखता था| कल ने तो कभी आना ही नहीं था|

खैरात (Bailouts) अब वैध (legalized) थी| संस्थागत (Institutionalized) थी| अंतरराष्ट्रीय स्तर पर| क्योंकि दौलत बनाना बहुत आसान हो गया था| अब किसी खून पसीने की ज़रूरत न थी| स्याही या कीबोर्ड स्ट्रोक (keyboard stroke) ही काफी थे|


म्यूजिकल चेयर (संगीत कुर्सियों) के इस खेल में उसे क्या करना चाहिए? संगीत तो रुकेगा, वह जानता था, लेकिन तब तक? खेलना पड़ेगा, क्योंकि वह अभी खेल में ही था| न खेलने का विकल्प नहीं था उसके पास|

तो क्या निश्चित ब्याज की परिसंपत्ति कम रखे वह, और शेयर और ज़मीन-जायदाद ज़्यादा, जो ज़्यादा जोखिम-भरे होने के बावजूद महंगाई से महफूज़ थे? क्या वह न्यूज़ीलैण्ड में स्थानीय संपत्ति बनाये रहे या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विविधता लाना जारी रखे?

न्यूज़ीलैंड GFC से, अपेक्षाकृत सुरक्षित रूप से उभर आया था। फिर भी, GFC में उसकी लगभग सभी वित्त कम्पनियाँ बर्बाद हो गयी थीं| विश्व स्तर पर, किसी परिसंपत्ति को छुपने की कोई जगह कहीं नहीं मिली थी| नकद ने राज किया था| जब अगली सुनामी आएगी, तब भी क्या नकद और सोना सुरक्षित होंगे?

बाकी के कीवी क्या कर रहे थे? उधार ले रहे थे, ऐसा लगता था, और नकदी वक़्त ज़रूरत के लिए जमा कर रहे थे| कीवी परिवारों के बैंक खातों में 162 अरब न्यूज़ीलैण्ड डॉलर (NZD) नगद लबालब भरा था, जो कि पिछले साल के मुकाबले लगभग 11 अरब NZD (7.1%) ज़्यादा था|

शायद विश्व युद्ध II के बाद के लगभग दो दशकों (1946-1964) में पैदा हुए लोग (बेबी बूमर्स) अपनी परिसंपत्ति भुना रहे थे, जबकि युवा पीढ़ी घर खरीदने के लिए उधार ले रही थी|

दिसंबर 2016 के अंत तक के रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड (RBNZ) के आंकड़े दिखाते थे, कि कीवी घरेलू वित्तीय देनदारी (ज़्यादातर बंधक, यानि मॉर्गेज) NZD 263 अरब की थी, हमारी कुल नकदी से सिर्फ 100 अरब ज्यादा| बुरी नहीं, हालाँकि ज़्यादातर टिप्पणियाँ ऐसा दिखाती थीं जैसे देश निजी उधार के कारण कंगाली के कगार पर खड़ा है|

RBNZ आंकड़े ये भी दिखा रहे थे, कि हमारी घरेलू प्रयोज्य आय (हाउसहोल्ड डिस्पोज़ेबल इनकम) NZD 156 अरब सालाना है| घरेलू कर्ज अब घरेलू प्रयोज्य आय का 168% था - एक नयी कीर्तिमान ऊँचाई!

पर फिर भी, कुल नकद और आय मिलकर पूरा कर्जा दो साल में चुकाया जा सकता था| एक बात और साफ़ थी| ऐतिहासिक रूप से, कीवी उधार लेने से कतराते रहे थे, और उतने ही पैर फैलाते थे जितनी चादर हो|

NZD 230 अरब की हमारी केवल बंधक उधारी, NZD 95 अरब के हमारे बकाया व्यापार क्रेडिट और NZD 61 अरब के कृषि ऋण से कहीं अधिक थी| लेकिन किया क्या जाए? ऑस्ट्रेलियाई बैंक आवास पर उधार ज्यादा आसानी से देते थे|

फिर भी, RBNZ 60% LVR (लोन-टू-वैल्यू रेशियो) नियम तेजी से लागू करने के लिए मजबूर किया गया था| घर खरीदने के लिए 40% पूँजी खुद की होने की बंदिश से निवेशकों पर खूब असर पड़ा था, हालाँकि रिहाईशी मालिकों और पहला घर खरीदने वालों पर ये बंदिश न होने से बाज़ार में उनकी चुस्ती बरकरार थी|

ये सही था कि पिछले 12 महीनों में, न्यूजीलैंड घरेलू ऋण में 8.4% की बढ़ोतरी हुई थी (NZD 20 अरब - आवास ऋण 9% अधिक या NZD 19.2 अरब, और क्रेडिट कार्ड आदि अन्य घरेलू क्रेडिट 4% या NZD 0.6 अरब ज्यादा)।

यह हमारी प्रयोज्य आय में वृद्धि की दर (4.4% बढ़त, यानि NZD 6.5 अरब) से लगभग दोगुना थी| और हमारे व्यापार और कृषि ऋण के विकास की दर से भी लगभग दोगुनी|

फिर भी, ब्याज दर में कटौती की वजह से घरेलू कर्ज अब इतना किफायती हो चुका था, जितना वह पहले कभी नहीं रहा था| ऋण शोधन लागत (डेट सर्विस कॉस्ट) प्रयोज्य आय का केवल 8.6% थी, एक साल पहले के 9.4% से नीचे (दिसम्बर 2008 में 13.9%)| हाल में मचे तहलकों के बावजूद, दशकों तक इसके नीचे ही रहने की उम्मीद थी|

न्यूजीलैंड के घरों और भूमि का मूल्य (इन आंकड़ों का संग्रह ज़रा पिछड़ा ही रहता था) भी सितम्बर 2016 तक के 12 महीनों में, लगभग 16% (या NZD 750 अरब से अधिक) बढ़कर NZD 12 खरब हो चुका था|

इसलिए 2007 के बाद के नौ सालों में, न्यूजीलैंड धन के इस प्रभाव में खिल उठा था और बाहर खाने पर हमने 57%, बीमा पर 60%, किराए पर 67% और परिवहन पर 50% अधिक खर्च किया था, हालाँकि इस दौरान हमारी आय केवल 32% ही बढ़ी थी|

क्रेडिट कार्ड पर हमने रेकॉर्ड खर्च किया था, क्योंकि इससे पहले हम कभी इतने अमीर भी नहीं रहे थे| शुक्रिया नोटों की छपाई (Quantitative Easing), आप्रवासन (Immigration), वैश्वीकरण (Globalization)!

लेकिन रियर व्यू मिरर (पीछे देखने का शीशा) में हर समय देखते हुए कार आगे ड्राइव तो नहीं की जा सकती|

आगे देखते हुए, तनख्वाहें अगले कुछ वर्षों में सीपीआई (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, या मुद्रास्फीति) से अधिक बढ़ने की उम्मीद नहीं थी, यानि किराये कितना बढ़ सकेंगे, इस पर अंकुश था|

लेकिन आव्रजन (Immigration) के बढ़े रहने, और नए घर कम बनने की उम्मीद बरकरार थी| तो बयान बाज़ी के बावजूद, मांग और आपूर्ति की स्थिति विक्रेता के लिए अनुकूल ही थी|

प्रॉपर्टी मार्केट को गिराना किसी के हक़ में न था, और बिल इंग्लिश घोषणा कर ही चुके थे कि ऐसा करने का उनका कोई इरादा भी न था| तो और मकान खरीदने चाहियें क्या?

ख़ामोशी से वह अपनी खिड़की से बाहर ताक रहा था, किसी अदृश्य भविष्यवक्ता ग्लोब में घूरता|

दौलत देगी सुराग, उसने खुद को समझाया| खोज लेगा तू, कि क्या करना है...

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