आध्यात्मिक कहानियाँ

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Child paintingबच्चों के लालन-पालन के प्रश्नों में उलझी एक आध्यात्मिक कहानी

“जीवन-दीक्षा के आगे मेरी दीक्षा तुच्छ है, तेरी कृतियों पर मेरे हस्ताक्षर छोड़ देगी,” ये कह चित्रकार पिता ने अपने ही पुत्र को दीक्षा नहीं दी|

माँ-बाप न सिखाएँ, दिशा ने दें, तो बच्चे क्या सीख पाएँगे? 

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Baby Boy Typingबोधकथा: हम काम किसलिए करते हैं?

पैसे के लिए, या उस क़ाबलियत के लिए कि हम अपना वक़्त और पैसा अपने प्रियजनों पर खर्च कर सकें|

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Untitledबोधकथा: तुम पत्ता हो या जड़?

जीवन में आये लोगों की, एक पेड़ के हिस्सों से तुलना व उनका वर्गीकरण:

पत्ता लोगों, शाखा लोगों और जड़ लोगों में

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Painting - Le Bon Samaritain (The Good Samaritan) by Aimé Nicholas Morotआध्यात्मिक कहानी: नेक सामरी

अच्छा बनने में खतरा है| तो इस पुनरुक्त ईसाई दृष्टांत में यीशु का सन्देश क्या था?

हमारे जीवन में धर्म का क्या उद्देश्य है?

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muddy_feetआध्यात्मिक कहानी: सनी कैसे न?

बरसात की एक अँधेरी रात में कबीर अपनी पत्नी माई लोई को एक साहूकार के पास ले चला ताकि वो उसके साथ सोकर अपना कर्ज़ उतार ले

 

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Evening in Ranikhet.“मैं खुशी चाहता हूँ,” एक आदमी ने कभी बुद्ध से कहा था|

चाइना पीक से नैनीताल को निहारते रोष को, बुद्ध दे जाते हैं खुशी और सुकून के राज़|

 

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Spooky Moonपुनरुक्त अरेबियन नाइट्स किस्से: अली बाबा और 40 डाकू 20

उसका दर्द क्रोध में बदल गया|

क्रोध घृणा बन गया| घृणा ने उसे जीने का मकसद दे दिया|

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Holiसिक्के के दो पहलु - हेड व टेल की तरह, आदमी के भी दो पहलु होते हैं - अच्छाई और बुराई|

अच्छे-बुरे लोग नहीं होते, अच्छी-बुरी हमारी नज़र होती है|

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imprisonedएक कैद बेटा जेल में रह कर भी अपने पिता की समस्याएँ सुलझा देता है|

जहाँ चाह, वहाँ राह|

हम अपने दिलों की दूरी से जुदा होते हैं, शरीरों की दूरी से नहीं|

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Prayerबोधकथा: माँ-बाप का कर्ज़

क्या ये कभी चुकाया नहीं जा सकता?

कैसा है ये पितृ-ऋण, जो आम आदमी माता-पिता की सच्ची सेवा से भी चुका नहीं पाता?